गेहू बेचने के लिए लगी है टकटकी, व्यापारियों के हाथों औने- पौने भाव फसल बेचने को विवश हैं किसान

क्रय केंद्रों में लटके हैं ताले,खरीद नहीं

लाइव सिटीज, बेगूसराय: सरकार की ओर से गेहूं की खरीदारी के लिए न्यूनतम समर्थित मूल्य 1840 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. दूसरी ओर सरकारी स्तर से प्रखंड क्षेत्र के पैक्सों में गेहूं की खरीदारी अब तक शुरू नहीं किए जाने से किसान व्यापारियों के हाथों औने- पौने भाव में गेहूं बेचने को विवश हैं. इसको लेकर किसानों में रोष व्याप्त है.

यह स्थिति सरकार व प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रही है. गौरतलब है कि सरकार की ओर से घोषित कार्यक्रम के तहत एक अप्रैल से ही गेहूं की खरीदारी सरकारी स्तर से शुरू हो जानी थी. लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी न तो पैक्स एवं न ही प्रखंड स्तर पर व्यापार मंडल द्वारा ही गेहूं की खरीद शुरू हो पायी है. फलस्वरूप किसान सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए टपला खाते फिर रहे हैं. किसानों की स्थिति यह है कि वह व्यापारियों के हाथों सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य से तीन से चार सौ रुपए कम दर पर गेहूं बेचने को विवश हैं.

किसानों को नहीं मिल रही है अनुदान की राशि

एक तरफ जहां सरकार किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं चला रखी हैं, वहीं दूसरी तरफ विभागीय लापरवाही के कारण वास्तविक अनुदान की राशि भी किसानों को समय पर नहीं मिल पा रही है. इसके कारण किसानों में आक्रोश है. वित्तीय वर्ष 2018 – 19 के तहत 113 किसानों ने श्री विधि से धान की खेती की थी. साल बीतने को है पर अब तक उन्हें अनुदान की राशि नहीं मिली है. सुजानपुर के किसान राजकिशोर चौधरी, दुनहीं के प्रवीण कुमार, खखरुआ के संजय यादव आदि ने बताया कि श्री विधि धान के लिए किसानों ने 3280 रुपये निर्धारित दुकान में जमा कर किट खरीदा था.

साल भर होने को है, पर अब तक अनुदान की राशि नहीं मिल पाई है. इसी तरह जीरो टिलेज से गढ़पुरा के 200 किसानों ने गेहूं की खेती की थी. इसमें भी 3280 रुपए प्रति किसान अनुदान की राशि सरकार द्वारा दी जानी थी, किंतु वह भी नहीं मिल पाई है. यही हाल कमोबेश कृषि यांत्रिकीकरण योजना का भी है. इस योजना के तहत कुल 808 किसानों ने आवेदन दिए थे. इसमें 602 किसानों के आवेदन पूर्ण पाए गए. कुछ ही किसानों को इस योजना के अनुदान की राशि मिल पाई है. किसानों ने चारा मशीन, स्प्रे मशीन, पटवन का फीता, डिस्क हैरो, कल्टीवेटर, रोटावेटर आदि की खरीद की.

किंतु अब तक सैकड़ों किसानों को अनुदान की राशि प्राप्त नहीं हो पायी है. डीजल अनुदान में भी किसानों को बस एक पटवन का ही पैसा मिल पाया है, शेष अब तक आया ही नहीं. किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा चार पटवन के अनुदान की राशि घोषणा की गई थी, किंतु अब तक महज एक ही पटवन की राशि आ पाई है. प्रखंड कृषि अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि जल्द ही संबंधित किसानों के खाते में योजनाओं के अनुदान की राशि भेजी जाएगी.

बांक पैक्स के पैक्स प्रबंधक राजकिशोर सिंह ने बताया कि जिला सहकारिता अधिकारी के निर्देशानुसार उनके पैक्स के द्वारा गेहूं अधिप्राप्ति के लिए प्रस्ताव पत्र भेजा गया है. क्रय केंद्र के रूप में चयन भी कर लिया गया है. जल्द ही गेहूं की खरीदारी शुरू कर दी जाएगी. मालूम हो कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी डंडारी प्रखंड अन्तर्गत आठ पंचायतों में से एक मात्र बांक पैक्स के द्वारा ही गेहूं की खरीदारी सरकारी स्तर से की गई थी.

प्रखण्ड में सरकारी स्तर पर गेहूं की खरीद नहीं प्रारंभ होने से औने-पौने दाम पर इसे बेचने को किसान विवश हैं. प्रखण्ड के पैक्सों या व्यापार मंडल में इसके लिए किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं है. 30 अप्रैल से सरकारी स्तर पर गेहूं खरीद की घोषणा की गई थी. लेकिन इसे चालू नहीं होने से किसानों में असंतोष है. प्रखण्ड किसान सभा के सचिव दिनेश सिंह ने कहा कि रबी फसल तैयार होने पर किसानों के घर शादी- विवाह निर्धारित किया जाता है.

रबी उत्पादन की बिक्री से प्राप्त आय किसानों के लिए लग्न को संम्पन्न करने में सहायक बनता है. सरकार द्वारा इसका समर्थन मूल्य 1840 निर्धारित किया गया है. लेकिन क्रय केन्द्र चालू नहीं हो सका. नतीजतन व्यापारी किसानों से 1550 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीद रहे हैं. किसानों को महाजन को कर्ज भी चुकाना पड़ता है. अधारपुर के किसान नबल किशोर सिंह ने बताया कि सरकारी क्रय केन्द्र पर गेहूं बेचने के लिए पहले कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन निबंधन कराना होगा.

इसके लिए किसानों को परेशानी होगी. उन्होंने बताया कि व्यापारियों के हाथ बेचने से किसानों को 140 से 240 रुपये प्रति क्विंटल घाटा हो रहा है. तेघड़ा प्रखण्ड के किसानों की जीविका का मुख्य साधन कृषि है. इसमें रबी फसल मुख्य है. रबी फसल के सहारे ही जरूरत की चीजों को पूरा किया जाता है. किसानों का आरोप है कि व्यापारियों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियो द्वारा जानबूझकर सरकारी क्रय केन्द्र बिलम्ब से चालू किया जाता है.