गंगा में डूबे तीनों बच्चों का मिला शव, परिजनों को मिलेगा मुआवजा

बेगूसराय : सहायक थाना चकिया क्षेेत्र के सिमरिया गंगा घाट में नहाने के दौरान रविवार को तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई. नगर परिषद बीहट के वार्ड नंबर 17 मंझलीवन टोला निवासी जय-जय राम पासवान के घर में बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए गांव घर और रिश्तेदार के लोग सिमरिया गंगा घाट पहुंचे थे. इनके साथ गांव के ही राजकुमार पासवान का पुत्र नीतीश कुमार (15), महेश पासवान का पुत्र अमन कुमार उर्फ बीडीओ (13) और अरविंद पासवान का पुत्र नीरज कुमार उर्फ गुलशन (14) भी मुंडन संस्कार में सिमरिया गंगा घाट गया था.

तीनों एक साथ गंगा नदी में नहाने गया. इस दौरान गहरे पानी में जाने से डूब गया. जबतक लोगों की नजर उस पर पड़ी तबतक तीनों डूब गया था. इसके बाद मुंडन गीत की जगह चीख-पुकार मच गई. इसके बाद घाट पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई. स्थानीय राहत बचाव दल के गोताखोर ने तीनों बच्चों को पानी से निकालने में जुट गए.

तीन घंटे के अथक प्रयास के बाद निकला शव

घटना की जानकारी मिलते ही चकिया थानाध्यक्ष अजीत कुमार और बरौनी बीडीओ ओम राजपूत घाट पर पहुंच गए. इसके बाद पानी में डूबे बच्चों को निकालने का प्रयास और तेज कर दिया गया. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पहले नीतीश कुमार और अमन कुमार का शव एकसाथ मिला. इसके करीब 1 घंटे बाद नीरज कुमार का शव मिला. शव मिलते ही चीख-पुकार तेज हो गई.

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बीडीओ ओम राजपुत ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय भेज दिया. बीडीओ ने बताता कि आपदा राहत कोष से मृतक के परिवार को 4-4 लाख रुपये सहायता राशि दी जाएगी. मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि सिमरिया गंगा घाट पर किसी भी प्रकार की सुरक्षा से संबंधित सुविधा उपलब्ध नहीं है.

राजकीय मेला घोषित कर करोड़ों की राजस्व प्राप्ति, पर सुविधा नदारद

सिमरिया गंगा घाट को राजकीय मेला स्थल घोषित करने के बाद सरकार को सालाना लगभग दो करोड़ की राशि प्राप्त हो रही है पर सुविधा नदारद है. जबकि यहां डूबने की घटना अक्सर घट जा रही है. यहां न तो एनडीआरएफ की कोई टीम तैनात किया गया है और न ही गोताखोर. स्थानीय गोताखोर को सरकार से पैसा नहीं मिलता है. पानी के अंदर न तो बैरिकेटिंग की व्यवस्था है और न ही गंगा घाट पर साफ-सफाई की. 4 वर्षों पर कुंभ-महाकुंभ के आयोजन के समय सुविधा की मांग उठती है. नेता-राजनेता पहुंच कर घोषणा का अंबार लगाते हैं पर ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है.