अंबेडकर जयंती के अवसर पर स्वच्छता अभियान चलाने का निर्णय

नवगछिया/भागलपुर : अंबेडकर जयंती के शुभ अवसर पर भारतीय जनता पार्टी बिहपुर प्रखंड के सभी पंचायत में स्वच्छता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. इस कड़ी में मरवा पंचायत अध्यक्ष अमित कुमार राय की अध्यक्षता में महादलित  मोहल्ले में स्वच्छता अभियान चलाया गया. जिसमे पंचायत के अनमोल कुमार, श्वेतांबर राय, सुमित चौधरी, सौरभ कुमार, रत्नेश कुमार, विपिन चौधरी, नयन कुमार, गौतम कुमार, अभिषेक कुमार, शुभम गौरव, ननकू समेत सभी युवाओं के सहयोग से इस कार्यक्रम को सफल बनाया गया. धर्मपुररत्ती पंचायत अध्यक्ष राज किशोर सिंह जी की अध्यक्षता में बैठक कर डाँ अंबेडकर जी के विचारों को रखा गया. प्रो भोला कुँवर जी ने कहा बाबा साहब हम हिंदू के बीच छूआछूत को समाप्त करने का प्रयास किया और संविधान में भी दलित महादलित को समान अधिकार दिलाया. कार्यक्रम में रुपेश कुमार रूप अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी बिहपुर, प्रेमचंद सिंह, अर्जुन राम राम दास एतवारी राम ब्रहमदेव राम समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे.

वहीं नारायणपुर प्रखंड के सन साइन पब्लिक स्कूल के प्रांगण शिव प्राण मैटी मिशन ऑफ इंडिया के द्वारा संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की 126वी जयंती मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर व तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर की गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य ललन कुमार ने किया. मौके पर मिशन सचिव डॉ सुभाष कुमार विद्यार्थी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता है बल्कि कर्म से महान होता है. इस बात को नीच जाति में जन्म लिए बाबा साहेब अम्बेदकर ने अपने श्रेष्ठ कर्म से भारतीय संविधान को निर्माण कर सिद्ध कर दिखाया. इनका जन्म आज ही के दिन सन 1891 को मध्य प्रदेश के इंदौर के मऊ छावनी में हुआ था. इनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता भीमाबाई था. अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान के रूप में जन्में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे. भीमराव अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और बेहद निचला वर्ग मानते थे. बचपन में भीमराव अंबेडकर के परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था. भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था. अंबेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्य करते थे और उनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवारत थे. भीमराव के पिता हमेशा ही अपने बच्चों की शिक्षा पर जोर देते थे. सन 1894 में भीमराव अंबेडकर जी के पिता सेवानिवृत्त हो गए और इसके दो साल बाद अंबेडकर की मां की मृत्यु हो गई. बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने कठिन परिस्थितियों में रहते हुए की. रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटिया मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए. अपने भाइयों और बहनों मे केवल अंबेडकर ही स्कूल की परीक्षा में सफल हुए और इसके बाद बड़े स्कूल में जाने में सफल हुये. अपने एक ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे के कहने पर अंबेडकर ने अपने नाम से सकपाल हटाकर अंबेडकर जोड़ लिया जो उनके गांव के नाम अंबावडे पर आधारित था.


मौके पर अवकाश प्राप्त शिक्षक राजेन्द्र कुमार मंडल ने कहा कि सैकड़ो वर्ष की गुलामी से भारत की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक स्थिति चरमरा गई थी. आजादी के बाद देश की सर्वागीण विकास एवं अपने खोये हुए अतीत को फिर से प्राप्त कर वैभवशाली राष्ट्र निर्माण हेतु एक सशक्त संविधान की आवश्यकता थी. जिसकी पूर्ति दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिन के अथक प्रयास से डॉ भीमराव अंबेडकर ने की. डॉ भीमराव अंबेडकर बचपन से ही प्रतिभावान थे. होनहार विद्वान के हो चिकने पात के कहावत को चरितार्थ करते हुए इन्होंने भारत ही नहीं पूरे विश्व को एक नई रोशनी दी.


मौके पर अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने कहा कि न्याय के साथ विकास हो ऐसी व्यवस्था संविधान के माध्यम से बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने दी. समानता लाने के लिए इन्होंने भारतीय संविधान में बहुत सारी धाराएं को लिखा. विद्यालय के निदेशक मनोज कुमार यादव ने छात्रों से भारतीय संविधान अनुपालन करने एवं इसकी रक्षा करने के लिए कहा ताकि भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नवनिर्माण हो सके. इस अवसर पर सुरेंद्र झा, संजीव कुमार, दीपक प्रेमशंकर, मधुर मिलन नायक, अमरनाथ मिश्र, प्रेमशंकर भगत सहित सैकड़ो छात्र छात्राएं उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन कुंदन कुमार ने किया.

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