TMBU में शिक्षाविद/अधिकारी के मौजूदगी में गाड़ी खरीद घपला

नवगछिया/भागलपुर(राकेश कुमार रोशन) : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय बिहार सहित देश के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में शुमार है. परंतु इस विश्वविद्यालय में आए दिन विवादों का भंडारा सा लगा रहता है जिसमें कई पदाधिकारी की मिलीभगत रहती है. ऐसा ही एक विवाद विश्वविद्यालय में कुलपति की गाड़ी के खरीद पर हुआ है जो विश्वविद्यालय छात्रों को शिक्षा देता है. उन्ही शिक्षाविद के बीच ऐसी घपलेबाजी हुई है. आपको बता दूं कि तिलकामांझी विश्वविद्यालय द्वारा मार्च 2016 में वत्स ऑटोमोबाइल को गाड़ी के लिए 14 लाख 9 हजार का चेक दिया गया. गाड़ी की राशि देने के बाद भी वत्स ऑटोमोबाइल के द्वारा विश्वविद्यालय को सेकंड हैंड यानी पुरानी गाड़ी को नया करके दिया गया. पुरानी गाड़ी तो आ गई परंतु इसकी भनक किसी को नहीं लगी.

बाद में जब सर्विसिंग हेतु गाड़ी पूर्णिया ले जाया गया तो उस जगह पर ड्राइवर को यह बताया गया कि यह गाड़ी पुरानी है क्योंकि सर्विसिंग के वक्त जब कागजात मांग आ गया था तो जो कागजात दिए गए थे उसके अनुसार गाड़ी का चेचिस नंबर नहीं मिलता था. तब 3 दफा अलग-अलग कागजात विश्वविद्यालय प्रशासन को कंपनी के द्वारा उपलब्ध कराए गए थे. जब लापरवाही का मामला उजागर हुआ तो तत्कालीन कुलपति के द्वारा कंपनी का बकाया 48,000 रुपये की राशि को रोक दिया गया. साथ ही विश्वविद्यालय के द्वारा कहा गया कि कागजात उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो कंपनी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद एक जांच कमेटी बनाई गई जिसमें प्रो—वीसी प्रोफेसर रामयतन प्रसाद, पूर्व प्रॉक्टर डॉ. योगेंद्र व कुलसचिव सह पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. मोहन मिश्रा को शामिल किया गया. जांचोपरांत कमिटी के सदस्यों ने स्पष्ट लिखा है कि ये घटना एक संज्ञेय अपराध है.

विश्वविद्यालय की गलती:

मार्च 2106 में वत्स ऑटोमोबाइल को 14 लाख 9 हजार राशि का चेक दिया गया. गाड़ी ले ली गई. पर विश्वविद्यालय ने यह नहीं जांचा कि गाड़ी नई है या पुरानी. विश्वविद्यालय के अधिकारी द्वारा जब जिला परिवहन पदाधिकारी के पास गाड़ी का नंबर लाने जाया गया तो पूर्व में ही उस चेचिस नंबर वाले गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हो चुका था. अतः नियमानुसार गाड़ी का दूसरा नंबर नहीं मिल सकता था. फिर भी गाड़ी का नंबर बदलवा दिया गया. जो अभियंता गाड़ी लाने गए थे, वो बिना कागजात के ही गाड़ी लेते आये.

विश्वविद्यालय के वाहन चालक ने इस और तीन बार लिखित रूप से तत्कालीन कुलपति व प्रो—वीसी को जानकारी दी थी. फिर भी ये सूचना इस कुर्सी से उस कुर्सी तक ही रह गई. वत्स ऑटोमोबाइल के द्वारा ज्यादा का कोटेशन विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया गया था. फिर भी गाड़ी उनसे ही ली गई. जबकि मात्र दो कंपनियों ने ही विश्वविद्यालय को कोटेशन उपलब्ध कराया था. नियमानुसार कम से कम तीन कोटेशन होने जरूरी हैं.
वहीं कुलपति प्रोफेसर नलिनी कांत झा ने कहा कि दोषियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था. जिसका जवाब दिया गया था. जांच कमिटी के सदस्य व सलाहकार उसको देख रहे हैं. वर्तमान में जो अधिकारी दोषी पाये जायेंगे. अगर वो पद पर कायम हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अगर उनका इस विश्वविद्यालय से स्थानांतरण हो गया होगा या सेवानिवृत्त हो गए होंगे तो इसकी सूचना राजभवन को दी जाएगी.

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