भागलपुर: पानी की बर्बादी से बढ़ रहा पेयजल संकट

भागलपुर: जल ही जीवन है..जी हां दोस्तों गर्मी आने वाली है और सबसे अहम बात हम आपको बता दें कि जिस तरीके से हमने पानी का मिसयूज़ किया है उसकी सजा अब मिलने वाली है. कहने को तो हम खूब नारे लगाते है और यहां तक कि दूसरों को भी सलाह दे ही देते हैं कि पानी की बर्बादी न करें. और दूसरों कि परेशनी को भी अपना समझे.

आपको बता दें कि शहर में प्रतिदिन 50 लाख लीटर सप्लाई वाटर बर्बाद हो रहा है. इसकी मुख्य वजह ज्यादातर नल और प्याऊ में टोंटी नहीं होना और अंग्रेजों के जमाने की पाइप का जगह-जगह लीक होना है. वो कहते हैं न कि अंग्रेज तो चले गए लेकिन अपनी अंग्रेजी छोड़ गए. निगम व पैन इंडिया की उदासीनता तथा लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से पीने का पानी नाले में बह रहा है. यह व्यवस्था की बड़ी खामी है. तत्काल स्थिति नहीं सुधरी तो हमलोग बूंद-बूंद जल को तरस जाएंगे.

शहर को 60 एमएलडी पानी की दरकार

शहर में प्रतिदिन 60 एमएलडी से अधिक पानी की दरकार होती है. 2040 तक पेयजल की जरूरत 110 एमएलडी तक पहुंच जाएगी. बावजूद इसके लोग पानी को बर्बाद कर रहे हैं.

दरअसल शहर में 1020 जनता नल हैं. अधिकतर नल से बूंद-बूंद पानी रिसने से प्रति घंटा 10 लीटर पानी बर्बाद होता है. यही हाल सप्लाई वाटर के लिए लगाए गए नलों का भी है. ज्यादातर नलों में टोंटियां नहीं होने से लाखों लीटर पानी नाली में बह जाता है. यह चिंता का विषय है. अगर इस पानी को बचा लिया जाए तो 60 हजार लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है.

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