बीते छह साल में बेरोजगार हुए 3.2 करोड़ खेतिहर मजदूर, 2017-18 में रोजगार के अवसर हुए कम

प्रतीकात्मक फोटो

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : देश में 1993-1994 के बाद पहली बार पुरुष कामगारों की संख्या घटी है. नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में पुरुष कामगारों की संख्या घट रही है. वहीँ, बीते छह साल के दौरान ग्रामीण भारत में काम करने वाले करीब 3 करोड़ से ज्यादा खेतिहर मजदूर बेरोजगार हुए हैं. वित्तीय वर्ष 2011-12 से लेकर 2017-18 के बीच हुई यह गिरावट करीब 40% की है. इंडियन एक्सप्रेस ने नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के सर्वेक्षण का हवाला देते हुए यह रिपोर्ट छापी है.

इस रिपोर्ट में एनएसएसओ द्वारा साल 2017-2018 में किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के हवाले से बताया गया है कि देश में पुरुष कामगारों की संख्या तेजी से घट रही है. इस दौरान करीब 3.2 करोड़ अनियमित मजदूर बेरोजगार हुए. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं गैर-कृषि कार्यों में कार्यरत अनियमित श्रम कार्य बल में 7.3% पुरुष बेरोजगार हुए, जबकि महिलाओं के लिए यह दर 3.3% रही. यानी आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले पांच सालों की तुलना में 2017-18 में देश में रोजगार अवसर बहुत कम हुए हैं.

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बता दें कि यह एनएसएसओ की वही रिपोर्ट है, जिसे केंद्र सरकार ने हाल में जारी होने से रोक दिया था. आम चुनावों के कारण सरकार द्वारा सर्वे को जारी करने में की जा रही देरी को लेकर इस साल जनवरी में आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था. इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने इसे प्रकाशित किया है.

सर्वे के अनुसार 2011-12 से राष्ट्रीय पुरुष कार्यबल 30.4 करोड़ से घटकर 28.6 करोड़ हो गया है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत का राष्ट्रीय कार्यबल 4.7 करोड़ घट गया है जो सऊदी अरब की जनसंख्या से अधिक है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरुष कर्मियों की संख्या में गिरावट पहली बार 1993-94 में ही देखने को मिली थी. तब ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में इनकी संख्या 6.4 फीसदी और 4.7 प्रतिशत की कमी आई थी. उसके बाद 1999-2000, 2004-05 और 2011-12 की रिपोर्टों में यह बढ़ी थी. लेकिन अब यह संख्या फिर एक बार घटी है.

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