अब छत्तीसगढ़ में किस्मत आजमाएंगे नीतीश कुमार, शराबबंदी के मुद्दे पर जदयू लड़ेगा चुनाव

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लाइव सिटीज डेस्क: नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड छत्तीसगढ़ की सभी 90 विधानसभा सीटों पर ताल ठोंकने की तैयारी कर रही है. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जदयू बिहार की तर्ज पर पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा उठाने जा रही है. बिहार में शराबबंदी का जो मॉडल लागू किया गया है, उसका छत्तीसगढ़ में खासकर महिलाओं के बीच जनसमर्थन मिल रहा है. आदिवासियों के साथ होने वाले शोषण को भी पार्टी मुद्दा बनायेगी. छत्तीसगढ़ में समाजवादी लोगों की भूमि पर फिर से आंदोलन चलाया जायेगा.

महिलाओं के बीच जनसमर्थन मिल रहा

रविवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित जदयू राज्यस्तरीय कार्यकर्ता संकल्प सम्मेलन में इस मुद्दे पर जनता का पूरा सहयोग मिला. जदयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी और आरसीपी सिंह इसमें शामिल हुए. उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी का जो मॉडल लागू किया गया है, उसका छत्तीसगढ़ में खासकर महिलाओं के बीच जनसमर्थन मिल रहा है.

त्यागी ने बताया कि संकल्प सम्मेलन में राज्य भर से जदयू के कार्यकर्ता पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी रायपुर का दौरा किया था. एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने शराबबंदी का लोगों से संकल्प कराया था. उन्होंने बताया कि संकल्प सम्मेलन में यह दोहराया गया कि छत्तीसढ़ में बिहार के शराबबंदी मॉडल को अपनाया जायेगा.

युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण जनता का दोहन और शोषण दोनों बदस्तूर जारी है. पहले जब छत्तीसगढ़ नहीं बना था तो मध्यप्रदेश शोषण करता था, अब छत्तीसगढ़ में भी वही हो रहा है. छत्तीसगढ़ खनिजों के मामले में समृद्ध है लेकिन आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. सरकार फैक्ट्रियां लगा रही है, उद्योगपतियों को मुनाफा दिला रही है. यहां युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. आउटसोर्सिंग से नौकरियां बांटी जा रही हैं. धान के इस कटोरे में किसान प्रकृति पर निर्भर हैं.

पार्टी के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि हमें पता है कि पार्टी का छत्तीसगढ़ में जनाधार नहीं है. पुराना मूवमेंट तो बचा नहीं, एक दो उम्मीदवार अच्छे मिल जाएं तो अपनी उपस्थिति दर्ज हो जाएगी. हमारा उद्देश्य बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मॉडल को सबके सामने रखना है. कैसे उन्होंने बिहार में विकास किया और वे बेस्ट चीफ मिनिस्टर बने.

बता दें कि जदयू के इस फैसले से बीजेपी को नुकसान हो सकता है. दोनों ही दलों का बिहार में गठबंधन है. ऐसे में छत्तीसगढ़ में दोनों दलों का अलग -अलग चुनाव लड़ना बीजेपी के कुछ वोटरों पर असर डाल सकता हैं. खासकर के वैसे वोटर जिनका बिहार से संबंध है , उनका वोट बंट सकता है.

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