वीपी सिंह ने पिछड़ों के लिए आरक्षण की लड़ाई छेड़ी तो लालू ने उनका हाथ थामा था…

लाइव सिटीज डेस्क : आज आरक्षण के प्रणेता व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्मदिन  (25 जून 1931)  है. 1969 में वह पहली बार उत्तरप्रदेश विधानसभा में विधायक बने. अपने राजनीतिक जीवन में सफलता की सीढियां चढ़ते हुए वह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने. गठबंधन सरकार बनाते हुए 2 दिसम्बर 1989 को देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे. मंडल आयोग ने पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकारें उसे लागू करने से कतरा रही थीं. सात अगस्त 1990 को वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री के तौर पर संसद में मंडल आयोग की सिफारिशें स्वीकार करने की घोषणा की.

सोशल जस्टिस के सिपाही थे वीपी सिंह

वीपी सिंह के प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. भले ही आज दुनिया में वीपी सिंह नहीं हैं लेकिन एक सफल पीएम और सोशल जस्टिस के सिपाही के रूप में देश और दुनिया के लोग उन्हें याद कर रहे हैं. सोशल साइट्स पर वीपी सिंह की जयंती ट्रेंड कर रही है. सामाजिक न्याय में भरोसा रखनेवाले लोग उनको श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

तेजस्वी यादव ने याद किया

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी वीपी सिंह की जयंती पर उन्हें नमन किया है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा है- वंचित और उपेक्षित वर्गों की लड़ाई लड़ने वाले पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी॰पी॰ सिंह जी की जयंती पर हार्दिक नमन, कोटि-कोटि प्रणाम. हाशिये के समूहों के आप नायक है.

आगे एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा है- पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी॰पी॰ सिंह जी की गोद में खेला हूँ. उनसे व्यक्तिगत लगाव रहा है. हम उनके प्रति कृतज्ञ है. उनके छोटे से कार्यकाल ने देश की दशा और दिशा बदली. मंडल कमीशन लागू करना शेर के मुँह में हाथ डालकर दाँत गिनना था. वो सामाजिक न्यायवादियों के भरोसे पर खरा उतरे.

पटना के गांधी मैदान से भरी थी हुंकार

बता दें कि 90 के दशक में पटना के गाँधी मैदान की सद्भावना रैली में देश के सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद जनसैलाब के बीच जोशोखरोश के साथ वी पी सिंह का अभिनंदन कर रहे थे : राजा नहीं फ़कीर है, भारत की तक़दीर है.

7 अगस्त 1990 को मंडल कमीशन लागू करने की घोषणा वीपी सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने की थी. शरद यादव, रामविलास पासवान, अजीत सिंह, जार्ज फ़र्णांडिस, मधु दंडवते, सुबोधकांत सहाय, आदि की सदन के अंदर धारदार बहसों व सड़क पर लालू प्रसाद जैसे नेताओं के संघर्षों की परिणति वीपी सिंह द्वारा पिछड़ोत्थान के लिए ऐतिहासिक, साहसिक व अविस्मरणीय फ़ैसले के रूप में हुई.

सरकारी नौकरियों में पिछड़ों के लिए 27% आरक्षण

वी.पी. सिंह की सरकार ने 7 अगस्त 1990 को सरकारी नौकरियों में पिछड़ों के लिए 27% आरक्षण लागू करने की घोषणा की. बाद में जब मामला कोर्ट में अटका, तो लालू प्रसाद ने सबसे आगे बढ़ कर इस लड़ाई को थामा, रामजेठमलानी जैसे तेज़तर्रार वकील को न्यायालय में मज़बूती से मंडल का पक्ष रखने के लिए मनाया और लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया और 16 नवंबर 1992 को इंदिरा साहनी मामले में उच्चतम न्यायालय ने क्रीमी लेयर की बाधा के साथ आरक्षण लागू करने का निर्णय सुनाया.

साथ ही, तत्कालीन सरकार द्वारा आर्थिक रूप से विपन्न अगड़ी जातियों के लिए 10 % आरक्षण के नोटिफिकेशन को सिरे से खारिज़ किया, और कहा कि पिछड़ेपन का पैमाना महज आर्थिक नहीं हो सकता. इस मामले में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन सर्वप्रमुख क्राइटेरिया है. फ़ैसले में यह भी कहा गया कि एससी, एसटी और ओबीसी मिलाकर आरक्षण की सीमा 50 फ़ीसदी के पार नहीं जानी चाहिए.

About Razia Ansari 1527 Articles
बोल की लब आज़ाद हैं तेरे, बोल जबां अब तक तेरी है

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*