2019 चुनाव में प्राइवेट कंपनी से VVPAT खरीदना चाहती थी मोदी सरकार, RTI में बड़ा खुलासा

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लाइव सिटीज डेस्क : पिछले दिनों जिस तरह से कई कई राज्यों के चुनाव नतीजे आए, उसके बाद तमाम राजनीतिक दलों ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए थे. जिसके बाद चुनाव आयोग ने सभी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट मशीन लगाने का फैसला लिया था, जिससे कि लोगों का चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बरकरार रहे. लेकिन इस बाबत सूचना के अधिकार के तहत बड़ा खुलासा हुआ है. जो बहुत ही चौंकाने वाला है.

दरअसल, साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में वोटर वेरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) यूनिट्स की कमी न हो इसके लिए केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग (इलेक्शन कमीशन) से इन्हें प्राइवेट कंपनी से खरीदने के लिए कहा था. साथ ही इसकी लागत को लेकर भी सवाल किया था. हालांकि, चुनाव आयोग ने सरकार की मांग को ये कहते हुए ठुकरा दिया कि किसी प्राइवेट कंपनी से वीवीपीएटी खरीदना सही नहीं है. ऐसा करने से जनता के विश्वास को ठेस पहुंच सकता है. ऐसे में वीवीपीएटी को पब्लिक कंपनियां जो पहले से इसे बनाती आ रही हैं, सिर्फ उन्हीं से बनवाया जाए.

आरटीआई में हुआ खुलासा

आरटीआई में हुआ खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग को जुलाई से सितंबर 2016 के बीच तीन पत्र इस बाबत लिखकर सुझाव मांगा था. लेकिन इस पत्र के जवाब में चुनाव आयोग ने 19 सितंबर को लिखा कि हम इस बात पर पूरी तरह से विश्वास रखते हैं किक प्राइवेट निर्माता से ऐसे संवेदनशील काम के लिए मशीन नहीं ली जा सकती है, वीवीपैट मशीन ईवीएम का काफी अहम हिस्सा है. मुख्य सूचना आयुक्त नसीम जैदी ने केंद्र को लिखे जवाब में साफ किया है कि वह प्राइवेट निर्माता से यह मशीन नहीं खरीद सकते हैं.

आपको बता दें कि ईवीएम और वीवीपैट मशीन को शुरू से भारत में दो ही सरकारी उपक्रम सप्लाई करते हैं, जिसमे भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड जोकि बेंगलुरू में स्थित है और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद शामिल है. इन दोनों कंपनियों के अलावा चुनाव आयोग किसी अन्य प्राइवेट कंपनी से यह मशीन नहीं लेता है. वीवीपैट मशीन के जरिए मतदाता जब वोट देता है तो उसकी एक रसीद प्रिंट होती है, जोकि भविष्य में किसी भी विवाद से निपटने के लिए काफी अहम साबित हो सकती है.

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गौरतलब है कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनाव आयोग वीवीपैट मशीन का सिलसिलवार तरीके से इस्तेमाल शुरू करे, जिससे कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक सभी ईवीएम मशीनों को वीवीपैट से जोड़ा जा सके. जिसके बाद से लगातार चुनाव आयोग तमाम ईवीएम मशीनों को वीवीपैट से जोड़ रहा है. जिससे कि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह का संदेह नहीं रहे.

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