Christmas 2018: आधी रात को प्रभु यीशु ने लिया जन्म, दिया था सत्‍य और प्‍यार का संदेश

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः आज पूरे विश्व में क्रिसमस बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है. ईसाई समुदाय के लोग इसे ईसा मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं. क्रिसमस के मौके पर लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं, और गिरजाघरों (चर्च – ईसाई पूजाघर) को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है. लोग अपने घरों के आंगन में क्रिसमस ट्री बनाकर उसे रंग-बिरंगे खिलौनों से सजाते हैं.

गिरजाघरों में यीशु के जन्म से संबंधित झांकियां तैयार की जाती हैं. 24 दिसंबर की आधी रात यीशु का जन्म होना माना जाता है, इसलिए गिरजाघरों में ऐन वक्त पर विशेष प्रार्थना की जाती है, कैरोल गाए जाते हैं और अगले दिन धूमधाम से त्योहार मनाया जाता है. ईसाई लोग ईसा मसीह को परमपिता परमेश्वर का पुत्र मानते हैं. ईसा मसीह को यीशु के नाम से भी पुकारा जाता है.

ईसाई धर्म के लोगों का मानना है कि जीसस दुनिया में लोगों को सही रास्ता दिखाने आए थे. आज हम आपको ईसा मसीह से जुड़ी 5 बातें बता रहे हैं. ईसाई मान्यताओं के अनुसार आज से हजारों साल पहले नासरत में गेब्रियल नामक एक स्वर्गदूत ने मरियम को दर्शन दिया और कहा कि तू पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती होगी और एक पुत्र देगी जिसका नाम यीशु रखा जाएगा. बैतलहम में मरियम ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम यीशु रखा.

ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह परमेश्वर के पुत्र थे. उन्‍हें मृत्‍यु दंड इसलिए दिया गया था क्‍योंकि वो अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए लोगों को श‍िक्षित और जागरुक कर रहे थे. उस वक्‍त यहूदियों के कट्टरपंथी रब्‍बियों यानी कि धर्मगुरुओं ने यीशु का पुरजोर विरोध किया. कट्टरपंथ‍ियों ने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस से यीशु की श‍िकायत कर दी. रोमन हमेशा इस बात से डरते थे कि कहीं यहूदी क्रांति न कर दें. ऐसे में कट्टरपंथ‍ियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया.

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