हमारे देश के संविधान को सेना ने नहीं, बल्कि ‘हीलियम’ ने बचा रखा है, जानें क्या है खास

लाइव सिटीज डेस्क : हमारे भारत देश की सुरक्षा सेना करती है. सरहद पर पड़ोसी देश से बचाना हो या बड़ी आपदा से सुरक्षित रखना, सभी कुछ भारतीय सेना करती है. बड़े-बड़े नेताओं से आम जनता तक, भारतीय सेना भारत को हर तरीके से सुरक्षा मुहइया कराती है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि भारत की कानून व्यवस्था को चलाने वाले संविधान की रक्षा भारतीय सेना के हाथ में नहीं है? बल्कि उसे एक गैस ने सुरक्षित रखा हुआ है! इस गैस का नाम है हीलियम. नीचे जानें इसके बारे में.

क्या है हीलियम?

हाइड्रोजन के बाद सबसे हल्की गैस है हीलियम. इसकी खोज फ्रैंकलैण्ड और लोकेयर ने की. इस गैस का कोई रंग नहीं होता और ना ही इससे आग लग सकती है. यह गैस हर तरह के तापमान में बनी रह सकती है. फिलहाल इस गैस को वायुयान के टायरों में भरने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि हल्की होने के कारण यह विमान को ऊपर उठाने में मदद करती है. इसके साथ ही मौसम संबंधी जानकारी के लिए भी गुब्बारे में हीलियम गैस भरकर आसमान में छोड़ा जाता है. अस्पतालों में दमा के रोगों को कृत्रिम सांस के तौर पर हीलियम और ऑक्सीजन गैस का मिश्रण दिया जाता है.

भारतीय संविधान के बारे में कुछ बातें

26 जनवरी 1950 के दिन भारतीय संविधान लागू किया गया था. इसे डॉ. भीमराव आंबेडकर की अध्यक्षता में लिखा गया, इसलिए उन्हें ‘संविधान का निर्माता’ कहा जाता है. लेकिन उनके साथ संविधान बनाने वाली समिति में जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने भी थे. उस वक्त टेक्नोलॉजी का खासा विकास नहीं हुआ था. इसी वजह से 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भागों में विभाजित ये संविधान कागज पर कलम से लिखा गया. 8 से बढ़कर आज अनुसूचियों की संख्या 12 है. इसे बनने में 2 साल 11 महीने 18 दिन का समय लगा.

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