दिल्ली सरकार ने MAX अस्पताल का लाइसेंस रद किया, जिंदा बच्ची को बताया था मरा हुआ

Max_Shalimar_Bagh6
मैक्स अस्पताल, शालीमार बाग़, नई दिल्ली (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आज शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की है. दिल्ली सरकार ने राजधानी के शालीमार बाग़ स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद कर दिया है. मैक्स अस्पताल प्रबंधन ने हाल ही में एक जीवित बच्चे को मृत बताकर उसे पैकेट में परिजनों को सौंप दिया था. दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने अभी कुछ देर पहले यह जानकारी है. जैन ने कहा है कि मैक्स अस्पताल द्वारा बरती गई लापरवाही स्वीकार करने योग्य नहीं है.

बता दें कि दिल्ली के शालीमार बाग में स्थित मैक्स अस्पताल ने बुधवार को एक 22 हफ्ते के जीवित बच्चे को मृत घोषित कर दिया था और शव को कपड़े में बांधकर परिजनों को दे दिया था. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR तक दर्ज नहीं की थी और मामला मेडिकल की लीगल सेल को फॉरवर्ड कर दिया था. इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में जमकर हंगामा किया था.



SATYENDRA-JAIN
दिल्ली सरकार के फैसले की जानकारी देते स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन
हुआ था जुड़वां बच्चों का जन्म

दरअसल,  महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. इनमें एक लड़का था और दूसरी लड़की. परिवार वालों ने बताया कि डिलीवरी के साथ ही बच्ची की मौत हो गई थी. डॉक्टरों ने दूसरे जीवित बचे बच्चे का इलाज शुरू कर दिया था, लेकिन एक घंटे बाद अस्पताल ने दूसरे बच्चे को भी मृत घोषित कर दिया था. हालांकि बाद में पता चला कि वो जीवित है. इसके बाद उसका अग्रवाल अस्पताल में इलाज चला, लेकिन फिर उसकी भी मौत हो गई.

मैक्स के अपने हैं तर्क

इस मामले पर मैक्स अस्पताल ने कहा था कि दोनों बच्चों का जन्म 30 नवंबर 2017 को हुआ था. डिलीवरी के वक्त बच्चों की उम्र 22 सप्ताह थी. हम इस दुर्लभ घटना से सदमे में हैं. हमने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, बच्चे को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को तत्काल छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया है.

संपत्ति जब्ती पर बोले तेजस्वी- प्रूफ है तो चार्जशीट करें, मैं कोर्ट में दूंगा जवाब
मणिशंकर अय्यर पर बोले रामविलास – यह कांग्रेस की बीमार मानसिकता

इस मामले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन भी मैक्स अस्पताल और डॉक्टरों के पक्ष में आकर खड़ा हो गया था. एसोसिएशन ने बयान जारी करके कहा था कि ‘समय से पहले होने वाली ऐसी डिलीवरी के लिए कोई प्रोटोकॉल या गाइडलाइंस नहीं है. लेकिन भारत का कानून 20 हफ़्ते तक गर्भपात की इजाज़त देता है और कुछ ज़्यादा गंभीर मामलों में 24 हफ़्ते में गर्भपात की इजाज़त अदालत ने दी है यानी भारतीय कानून भी 24 हफ्ते तक के भ्रूण को ज़िंदा ना बचने लायक मानता है.’