जेडीयू के आधा दर्जन सांसदों ने पीएम को लिखा पत्र कहा- जातिगत जनगणना नहीं कराने की घोषणा से से हम सब स्तब्ध एवं दुखी है

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार में जातीय जनगणना कराने की मांग सियासी जोर पकड़ने लगा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सदन में इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का काम किया. कल यानी शुक्रवार को दोपहर 1 बजे जातिगत जनगणना के विषय पर सीएम नीतीश से मिलने वाले हैं. मिलकर अपनी बात रखेंगे.

इधर JDU के करीब आधा दर्जन सांसदों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में सांसदों ने जातीय जनगणना कराने की मांग का जिक्र किया है. पार्टी के सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद, सांसद दिलकेश्वर कामत, सांसद आलोक कुमार सुमन, सुनील कुमार पिंटू, सांसद संतोष कुशवाहा और आलोक कुमार सुमन ने चिट्ठी लिखी है.

पत्र में सांसदों ने अपने नेता और बिहार की जनता की भावनाओं से अवगत कराते हुए लिखा कि ‘’संसद के मानसून सत्र में सरकार द्वारा बताया गया है कि 2021 की जनगणना जाति-आधारित नहीं होगी. इस सूचना से हम सब स्तब्ध एवं दुखी है. क्योंकि हमारी केन्द्र सरकार पिछड़ों एवं वंचितों के कल्याण के लिए जानी जाती है. यह सूचना निराशाजनक है’’.

पत्र में आगे सांसदों ने लिखा है कि ‘’आज देश के अधिकांश लोग जाति आधारित जनगणना का समर्थन करते हैं. जब तक पिछड़ें वर्गो की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलेगा तब तक उनके फायदे की योजनाएं कैसे बनेगी. जाति आधारित जनगणना से एससी, एसटी के अलावा भी अन्य कमजोर वर्ग है, उनकी वास्तविक संख्या की जानकारी होगी और सभी के विकास के कार्यक्रम बनाने में सहायता मिलेगी.’’

‘’सभी ओबीसी एवं अति पिछड़ा समाज के सांसदों का मानना है कि जाति आधारित जनगणना होगी चाहिए. बिहार विधानमंडल से 18 फरवरी 2019 एवं पुन:  27 फरवरी 2020 को सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पारित किया था तथा इसे केन्द्र सरकार को भेजा गया था. अब समय आ गया है कि केन्द्र सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए. हम सभी सांसदों का आग्रह है कि जातिगत जनगणना यथाशीघ्र करायी जाए. धन्यवाद.’’