झारखंड में ‘भूख’ से तड़पकर मर गई बच्ची, आधार-राशन कार्ड के चक्कर ने ले ली जान

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लाइव सिटीज डेस्क : झारखंड के सिमडेगा जिले में एक बहुत ही ह्रदय विदारक घटना सामने आई है. 11 साल की लड़की सिर्फ इसलिए भूख से तड़प-तड़प कर मर गई, क्योंकि उसका परिवार राशन कार्ड को आधार से लिंक नहीं करा पाया. संतोषी कुमारी नाम की इस लड़की ने 8 दिन से खाना नहीं खाया था, जिसके चलते बीते 28 सितंबर को भूख से उसकी मौत हो गई.

इस बीच, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज सिमडेगा उपायुक्त से 11 वर्ष की एक लड़की की हुई मौत के मामले में जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खबर से बहुत पीड़ा हुई है. साथ ही, सिमडेगा के उपायुक्त को 24 घंटे में स्वयं पूरे मामले की निष्पक्षता से और त्वरित जांच करते हुए रिपोर्ट सौपने के निर्देश दिया. मामले में सत्यता पाई जाती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

सीएम ने तत्काल पीड़ित परिवार को 50 हजार की सहायता देने का निर्देश दिया. सिमडेगा के डीसी ने बताया कि तीन सदस्यीय जांच कमिटी ने मौत की जांच की है, जिसमें यह बात सामने आई है कि बच्ची की मौत मलेरिया से हुई है. मुख्यमंत्री ने डीसी को 24 घंटे में स्वयं जांच करने का निर्देश दिया है.

सीएम ने ट्वीट कर कहा है कि सिमडेगा में बच्ची के निधन से व्यथित हूं. उपायुक्त को तुरंत पीड़ित परिवार से मिलने को कहा है. पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी. सिमडेगा उपायुक्त स्वयं 24 घंटे में मामले की जांच कर रिपोर्ट देंगे. यदि कोई दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. मेरे झारखंड में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना दोबारा न हो, सभी अधिकारी ये सुनिश्चित करें.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मृत बच्ची संतोषी के पिता बेरोजगार हैं. मां और बड़ी बहन दातुन बेच कर हफ्ते भर के 80 रुपये की कमाई करती है. इसके अलावा गांव के लोग जानवरों को चराने के बदले उन्हे चावल दे दिया करते थे. झारखंड जो कि देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक है वहां गरीब परिवारों को प्रत्येक राशन कार्ड के बदले 35 किलोग्राम चावल देने का प्रावधान है.

मामले पर मीडिया से बात-चीत करते हुए झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री ने कहा कि ऐसे साफ निर्देश दिए गए हैं कि जिन लोगों के राशन कार्ड आधार कार्ड से नहीं जुड़े हुए हैं उन्हें भी राशन मिलना चाहिए. इस मामले की छानबीन की जाएगी साथ ही मैं अपने आदेश की एक और कॉपी फिर से भिजवा रहा हूं ताकि सनद रहे. अभी भी परिवार की हालत ठीक नहीं बताई जाती है. पूरा परिवार अभी भी आंगनबाड़ी से मिले खाने के पैकेट के भरोसे जिंदा है.