दिल्ली में 17 हजार पेड़ काटने का मामला, मनोज तिवारी ने ‘आप’ पर फोड़ा ठीकरा

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लाइव सिटीज डेस्क : दक्षिण दिल्ली में करीब 17 हज़ार पेड़ काटने के मामले ने अब राजनीतिक तूल ले लिया है. इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दाखिल की गई है, जिसपर आज सुनवाई होगी. इस मामले में कोर्ट सरकार और अथॉरिटी से जवाब तलब कर सकता है. इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो रही है, आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही है. तो वहीं बीजेपी ने भी AAP पर पलटवार किया है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी का कहना है कि इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का विरोध करना मुझे चौंकाता है, जबकि उन्होंने खुद ही पेड़ गिराने की परमिशन दी है.

केंद्र सरकार को बचाने की कोशिश

केंद्र सरकार के हाउसिंग प्रॉजेक्ट के लिए 17 हजार पेड़ों को काटे जाने का विरोध बढ़ता देख अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भी सुर बदल गए हैं. दिल्ली बीजेपी ने इस प्रॉजेक्ट को मंजूरी देने का ठीकरा दिल्ली सरकार के सिर पर फोड़ते हुए केंद्र सरकार को बचाने की कोशिश की है. यही नहीं, बीजेपी ने इस मसले पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मिलकर कोई रास्ता निकालने की बात भी कही है.

आप पर फोड़ा ठीकरा

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने खुद को एक किसान परिवार का सदस्य बताते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) पेड़ों की कटाई जैसे गंभीर मसले पर भी ओछी राजनीति कर रही है जबकि खुद दिल्ली सरकार ने इसकी इजाजत दी थी. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी चिपको आंदोलन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण आंदोलन के नाम का सहारा लेकर अपनी राजनीति को चमकाने की कोशिश कर रही है.

मनोज तिवारी ने कहा, ‘मैं खुद मानता हूं कि जब तक बेहद जरूरी न हो, पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि जल्द ही दिल्ली बीजेपी का एक प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मिलेगा और हम उनसे अनुरोध करेंगे कि यह कोशिश की जाए कि कम से कम पेड़ काटने पड़ें.’

क्या कहते हैं दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री

इस पूरे मामले पर दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने कहा कि 1 हेक्टेयर से ज्यादा पेड़ काटने की अनुमति देने का पावर एलजी के पास है. पेड़ काटने की फाइल पर मैंने आपत्ति जताई है. हुसैन ने कहा कि क्रंकीट के जंगल में सांस कैसे लेंगे, 17000 पेड़ कटने नहीं देंगे. भारत सरकार का विकास मंत्रालय सिर्फ NBCC को फायदा पहुंचा रहा है. सरकारी अफसरों के लिए दिल्ली के बाहर भी मकान बनाये जा सकते हैं.

दरअसल, एनबीसीसी साउथ दिल्ली के इलाकों में पुरानी इमारतों को तोड़कर बड़ी बहुमंजिला इमारतें बना रही है और उसी के लिए इन पेड़ों को काटा जा रहा है. सरोजिनी नगर के अलावा कस्तूरबा नगर, नैरोजी नगर, नेताजी नगर, त्याग राज नगर और मोहम्मद पुर शामिल है. ये प्रोजेक्ट एनबीसीसी (National Buildings Construction Corporation) के तहत पूरा हो रहा है, इसपर सफाई देने के लिए आज शाम NBCC की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जानी है. दूसरी ओर सरोजनी नगर इलाके में स्थानीय निवासी और कई NGO मिलकर चिपको आंदोलन चला रहे हैं. सभी लोग पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे हैं.

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बोल की लब आज़ाद हैं तेरे, बोल जबां अब तक तेरी है

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