केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले, दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु, भव्य तरीके से सजाया गया मंदिर

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लाइव सिटीज डेस्क : केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रविवार को खुल गए हैं. कपाट खुलने के साथ वैदिक मंत्रोच्चार भी किया गया. इस दौरान राज्यपाल केके पॉल भी मौजूद रहे. भगवान आशुतोष के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट को प्रात: 6.10 बजे विधि-विधान के साथ खोला गया. गर्भ गृह के कपाट 6 बजकर 15 मिनट पर खुले. केदारनाथ रावल के नेतृत्व में पुरोहितों ने गर्भ गृह में प्रवेश किया. अंदर साफ-सफाई की गई. साफ-सफाई के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया. इससे पूर्व तड़के चार बजे से पूजन शुरू हो गया था.

इसी के साथ मंदिर परिसर के आस-पास श्रद्धालुओं का हुजूम लग गया वे श्रद्धालु जो पहले भी केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए आते रहे हैं उन्हें इस बार मंदिर परिसर कुछ अलग नजर आया. दरअसल, राज्य सरकार द्वारा केदारनाथ धाम के आसपास निर्माण कार्य कराया गया है. बता दें कि मंदिर के प्रवेश द्वार को विशेष रूप से सुसज्जित कराया गया है, जिसकी धाम से दूरी 273 मीटर की है.



30 लाख का आंकड़ा छूने की उम्मीद

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 में 4.09 लाख भक्तों ने गंगोत्री, 3.92 लाख ने यमुनोत्री और 4.71 लाख ने केदारनाथ और 8.85 लाख ने बदरीनाथ के दर्शन किए. राज्य सरकार इस बात की उम्मीद जता रही है कि इस बार कुल भक्तों का यह आंकड़ा 30 लाख तक पहुंच सकता है.

भैया दूज पर बंद हो जाते हैं मंदिर के कपाट

हर साल भैया दूज पर भगवान आशुतोष के 11वें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं. इसके पीछे एक कहानी छुपी हुई है. भैया दूज पर शीतकाल के लिए कपाट बंद होने के बाद बाबा की चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचती हैं, जहां बाबा केदार की शीतकाल के छह माह पूजा की जाती है. केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने बताते हैं कि कुरुक्षेत्र युद्ध के उपरांत अपने पित्रों का कर्मकांड करने के बाद पांडवों को भैयादूज के दिन ही स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी. इसलिए भैया दूज से शीतकाल प्रारंभ माना जाता है और पंरपराओं के अनुरुप बाबा केदार के कपाट बंद किए जाते हैं.

भव्य तरीके से सजाया गया केदारनाथ मंदिर

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने केदारनाथ के मंदिर को 20 कुंतल गेंदा के फूलों से सजाया है. बिजली की रंग-बिरंगी लाइटें मंदिर की भव्यता को चार चांद लगा रही हैं. बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि मंदिर को सजाने के लिए ऋषिकेश से 26 अप्रैल को फूल केदारनाथ पहुंचा दिए गए थे. फूलों के साथ बेलपत्री, आम और पीपल के पत्तों की माला का भी उपयोग किया गया है.