लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क :  ये बात तो आपने सुनी होगी कि महिला ही महिला की दुश्मन होती है. लेकिन, इस बात को साबित करती हुई एक खबर हम आपको बता रहे हैं. बात बिहार के बहुचर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की है. दिल्ली की साकेत कोर्ट ने मामले में फैसला तो सुना दिया है. 19 आरोपी दोषी करार दिए गए हैं. 28 जनवरी को सज़ा पर भी मुहर लग जाएगी लेकिन लड़कियों के खिलाफ इस अपराध में महिलाओं की भूमिका आपको चौंका देगी.

19 दोषियों में से 8 महिलाएं इस महापाप का हिस्सा रहीं. सोचने वाली बात ये है कि इस रंग बदलती दुनिया में क्या एक लड़की अपनी माँ, बहन या सहेली पर भरोसा कर सकत है! हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में जिन महिलाओं पर असहाय लडकियों की सुरक्षा की जिम्मेवारी थी वही उनकी अस्मत लुटवाने में अहम भूमिका निभा रही थी.

बता दें कि दिल्ली की साकेत कोर्ट ने बालिका गृह के संचालक और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत 19 आरोपियों को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया है. 28 जनवरी को बहस के बाद फैसला लिया जाएगा कि दोषियों को कितनी सज़ा दी जाए.

पहले आप उन महिलाओं की लिस्ट देखिये जो इस महापाप में शामिल थी :

1. इंदू कुमारी- बालिकागृह की अधीक्षक

2. मीनू देवी- बालिकागृह में गृह माता

3. मंजू देवी- बालिकागृह में काउंसलर

4. चंदा देवी- बालिकागृह में गृह माता

5. नेहा कुमारी- बालिकागृह में केस वर्कर

6. किरण कुमारी- बालिकागृह में सहायक

7. रोजी रानी -रहिका, मधुबनी, बाल संरक्षण इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक

8. साइस्ता परवीन उर्फ मधु – ब्रजेश की राजदार

तीन बार टल चुका था फैसला

गौरतलब है कि इस मामले में फैसला अब तक तीन बार टल चुका था, लेकिन आज कोर्ट ने अपना निर्णय दे दिया. पहली बार 14 नवंबर को दिल्ली में वकीलों की हड़ताल, दूसरी बार 12 दिसंबर को जजों की छुट्टी के कारण फैसला टल गया था. जबकि तीसरी बार ब्रजेश ठाकुर की ओर से नई अर्जी दाखिल किए जाने के कारण फैसला टल गया था. हालांकि कोर्ट ने 18 जनवरी को ब्रजेश ठाकुर की अर्जी को खारिज कर दी थी.

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