भागलपुर रिमांड होम में दरिंदगी : बच्चों के साथ गंदा काम करता था वार्डन, मना करने पर चटवाता था थूक, आज हो सकता है पॉक्सो कोर्ट में फैसला

  • 8 में से 7 आरोपित हैं फरार

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : मुजफ्फरपुर बाल गृह में कांड के बाद एक वैसा ही मामला भागलपुर के बाल सुधार गृह का आया है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में CBI की चार्जशीट का हवाला है. दरअसल, भागलपुर में रेशम नगर मोहल्ले के बाल सुधार गृह में बच्चों के शोषण के मामले में पॉक्सो कोर्ट आज फैसला सुना सकता है. इस मामले में CBI की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बाल गृह का संचालन करने वाले NGO रूपम प्रगति समाज समिति की सचिव रूपम कुमारी समेत 8 लोग आरोपी हैं. इनमें से 7 फरार हैं. CBI ने भागलपुर के दो तत्कालीन DM वीरेंद्र यादव और आदेश तितरमारे से भी पूछताछ की थी. चार्जशीट में कई बच्चों की आपबीती भी बतायी गयी. जिसमें यह सामने आया कि वार्डन और NGO की सचिव बच्चों से हैवानियत कर रहे थे.

बच्चों ने शिकायत की तो उन्हीं की कर दी पिटाई

CBI के मुताबिक बच्चों ने बताया कि प्रवेश दास वार्डेन के रूप में काम करता था. वह 4 बच्चों के साथ रात में गंदा काम करता था. जो उसकी बात नहीं मानते थे, उससे थूक तक चटवाता था. मारता-पीटता भी था. बांका के एक बच्चे ने बताया कि एक बच्चे ने NGO की सचिव रूपम से इसकी शिकायत की तो दो लोगों (बंटी और प्रवेश) ने बच्चों को पीटा. यह बात किसी को दोबारा बताने के लिए भी मना कर दिया.

बांका के एक बच्चे ने CBI को बताया कि एक बार उसका हाथ कट गया था तब बड़ी मैडम (रूपम) ने दूसरे बच्चों को कहा कि हाथ कटने की जगह पर नमक-मिर्च लगा दो. ऐसा कर वह बच्चों को प्रताड़ित करती थी. वहीं, गोड्‌डा के एक बच्चे ने बताया कि देवचंद्र सिंह नाम का शख्स जब गुस्सा होता था तो वह बच्चों की जांघ पर खड़ा हो जाता था. एक बच्चे ने बताया कि मैडम छड़ी से पीटती थीं, खाना ठीक से नहीं देती थीं. ज्यादा नाराज होती थी तो हाथ-पैर बांधकर पीटती थीं.

शिकायत पेटी में चिट्‌ठी के आधार पर हुआ था ऑडिट

CBI ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) की ओर से पूरे मामले का भंडाफोड़ करने वाली एजेंसी कोशिश के हेड नौशाद से भी पूछताछ की. नौशाद ही टीम को लीड कर रहे थे. उन्होंने CBI को बताया कि अकाउंटेंट कुंदन कुमार के सामने 11 अक्टूबर 2017 को टिस के अधिकारियों ने बाल गृह का ऑडिट किया था. उन्होंने सबसे पहले शिकायत पेटी को खुलवाया था. उनमें पड़ी चिट्ठियों के आधार पर बच्चों से बात की और उनके साथ हो रही ज्यादती का रिपोर्ट में जिक्र किया था. एजेंसी कुछ बच्चों की अब भी तलाश कर रही है. नोएडा और कोलकाता में दो बच्चों के होम एड्रेस पर टीम गई थी. पर वहां उस नाम पता का कोई नहीं मिला.

6 दिसंबर 2018 को सरकार ने बाल गृह संचालन का रद्द कर दिया था अग्रीमेंट

CBI ने NGO रूपम प्रगति समाज समिति को सरकार से मिली चार साल की फंडिंग की कॉपी भी अटैच की है. इसमें बैंक अकाउंट की कॉपी लगाई गई है. करीब 80 लाख रुपये उन्हें चार साल में सरकार द्वारा बाल गृह के संचालन के लिए मिले थे. रूपम खगड़िया के परबत्ता स्थित करना गांव की रहने वाली हैं. उनके खिलाफ बाल संरक्षण पदाधिकारी विकास कुमार ने 6 दिसंबर 2018 को केस दर्ज कराया था. टिस की रिपोर्ट के बाद दर्ज FIR के बाद 6 अगस्त 2018 को सरकार ने बाल गृह संचालन का अग्रीमेंट रद्द कर दिया था.