लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार समेत पूरे देश में सीएए और एनआरसी के खिलाफ लगातार विरोध जारी है. दिल्ली के शाहीन बाग में भी लोगों का प्रदर्शन जारी है. इसी बीच जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ एक बार फिर से प्रतिक्रिया दी है. इस बार उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देते हुए एनआरसी और सीएए लागू करने की बात कही है.

प्रशांत किशोर ने गृह मंत्री अमित शाह से कहा है कि अगर आप नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ विरोध करने वालों की परवाह नहीं कर रहे हैं, तो फिर क्यों नहीं आगे बढ़ जाते हैं और इसे लागू करने की कोशिश करते हैं.

पीके ने ट्वीट कर अमित शाह को किया चैलेंज

मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार और जेडीयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने इस बाबत एक ट्वीट किया है. उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि ,’नागरिकों की असहमति को खारिज करना किसी भी सरकार की ताकत का संकेत नहीं हो सकता. अमित शाह जी, अगर आप नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का विरोध करने वालों की परवाह नहीं करते हैं, तो आप इस कानून पर आगे क्यों नहीं बढ़ते? आप सीएए और एनआरसी को उसी क्रोनोलॉजी में लागू करने का प्रयास करें, जो आपने राष्ट्र के लिए इतनी बड़ी घोषणा की है!’

अमित शाह ने दोहराया था सरकार का पक्ष

दरअसल मंगलवार को यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंचे अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार के पक्ष को दोहाराया था. उन्होंने कहा था कि जिसे विरोध करना है करे, लेकिन हम नागरिकता कानून को वापस नहीं लेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हम प्रदर्शनों के बीच पैदा हुए हैं. प्रदर्शनों के बीच ही बड़े हुए हैं. जब विपक्ष में थे, तब यही कहा था और अब सत्ता में हैं, तो यही कर रहे हैं. अमित शाह के इस बयान को आधार बनाकर पीके ने उन्हें चुनौती दी है. बता दें कि पहले भी अमित शाह ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट रुप से ये कहा था कि सीएए के मामले में सरकार एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी.

गौरतलब है कि सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली पार्टी जदयू ने संसद के दोनों सदनों में सीएए का समर्थन किया है. ऐसे में प्रशांत किशोर लगातार पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी कर रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर पार्टी प्रवक्ता पवन वर्मा ने मंगलवार को दिल्ली में पार्टी गठबंधन को लेकर नीतीश कुमार से सवाल किया. फिलहाल, नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान ये बात साफ की थी कि उन्होंने सीएए का समर्थन किया है लेकिन बिहार में एनआरसी नहीं लागू होने देंगे.

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