मजदूर के बेटे ने ठुकरा दी अमेरिकी नौकरी, बोला- पैसों से नहीं आर्मी की नौकरी से सुकून मिलता है

लाइव सिटीज डेस्क : भारत में लोग अच्छी नौकरी और अच्छे पैसे चाहते हैं और इसके लिए अगर उन्हें अपना देश छोड़ना भी पड़ जाए तो भी कोई पर्ख नहीं पड़ता है. उन्हें बस अच्छी नौकरी की तलाश रहती है। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो भारत को अपनी मां समान मानते हैं और उसकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. हम आज आपको एक ऐसे ही भारत मां के बेटे से मिलवाने जा रहे हैं.

भारत में रहकर सेना में अपनी सेवा दे रहे हैं



हम बात कर रहे हैं Barnana Yadagiri जो भारत में रहकर सेना में अपनी सेवा दे रहे हैं. बीते शनिवार को हैदराबाद की एक सीमेंट फ़ैक्ट्री में, 100 रुपए दिहाड़ी पर काम करने वाले Barnana Gunnaya की आंखों में खुशी के आंसू थे. मौका था इंडियन मिलिट्री अकादमी, देहरादून की पासिंग आउट परेड का और उनका बेटा Barnana Yadagiri ऑफिसर्स यूनिफॉर्म में था.

अमेरिकी कंपनी Union Pacific Rail Road से ऑफर को ठुकराया

ये बेटा जिसने पैसों के लिए अपने पिता को मजदूरी और पोलियो ग्रस्त मां को साफ-सफाई करते देखा था, उसने अमेरिका की नौकरी छोड़ कर सेना के साथ काम करने का फैसला लिया. बीते शनिवार Yadagiri को आई.एम.ए. से टेक्निकल ग्रैजुएट कोर्स में प्रथम स्थान अर्जित करने पर रजत पदक मिला. इससे उसका रास्ता आर्मी में इंजीनियरिंग यूनिट के लिए खुल गया.

अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद से पढ़ने के बाद Yadagiri के पास अमेरिकी कंपनी Union Pacific Rail Road से ऑफर था, पर उसने वो ठुकरा दिया.

देश के लिए काम करके सुकून मिलता है

एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में Yadagiri ने कहा – मेरे पिता एक साधारण व्यक्ति हैं. उन्हें लगा था कि आर्मी में जाना मतलब बतौर सैनिक ही होता है. उन्होंने मुझे कहा कि सेना के लिए अमेरिका की अच्छी खासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर मैं गलती कर रहा हूं. इन सब के बाद भी मैंने पैसे को ज्यादा तवज्जो नहीं दिया. मैं कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी कर के काफी पैसे कमा सकता था, पर वहां मेरा दिल नहीं लगता. देश के लिए काम करके जो सुकून मिलता है, वो पैसों से नहीं मिल सकता. Yadagiri जैसे ही देशभक्तों की हमें और जरूरत है, जो देश की उन्नति और सेना को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें.