EXCLUSIVE MOU : मनीषा दयाल ने 50 महिलाओं के लिए 1500 रुपये महीने का डॉक्टर रखा था

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्कः मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार वाले पटना आसरा होम मामले में लाइव सिटीज की पड़ताल लगातार जारी है . अब इस पड़ताल में लाइव सिटीज को वह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज प्राप्त हो गया है, जिसके आधार पर मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार ने समाज कल्याण विभाग से आसरा होम चलाने का काम लिया था . 6 फरवरी 2018 को दोनों पक्षों के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग तैयार हुई थी . यह 1000 रुपये के स्टांप पेपर पर है . समाज कल्याण विभाग की ओर से डायरेक्टर ने दस्तखत किया, जबकि अनुमाया ह्यूमन रिसोर्सेज फाउंडेशन की ओर से सेक्रेटरी चिरंतन कुमार ने . इस एकरारनामे से समाज कल्याण विभाग के सेक्रेटरी भी नहीं बचते हैं, क्योंकि डायरेक्टर उनके ही बदले MOU पर दस्तखत कर रहे हैं .

लाइव सिटीज को मिले इस एमओयू से कई बातें प्रमाणित होती हैं . लाइव सिटीज पहले से कहता रहा है कि समाज कल्याण विभाग में पटना के पेज-3 पार्टियों की शो वूमेन मनीषा दयाल को डायरेक्ट एंट्री डायरेक्टर रहे IAS सुनील कुमार ने ही दिलाई थी . सुनील कुमार के साथ मनीषा दयाल के भाई मनीष दयाल का खुला खेल पहले से था . सुनील कुमार जब लखीसराय में डीएम थे, तब उन्होंने मनीषा के भाई मनीष दयाल के साथ प्लांटेशन के खेल में स्ट्राइक मारी थी .

स्टाम्प पेपर चिरंतन कुमार लेकर आया

अब आप तस्वीरों को देखते चलिए . यह तस्वीरें एमओयू की है . सबसे पहले गौर करिए कि ₹1000 का स्टांप पेपर समाज कल्याण विभाग के पास लेकर चिरंतन कुमार आया था . विभाग से काम का सौदा फाइनल होने के बाद उसने यह स्टांप पेपर पटना के स्टांप वेंडर युगल किशोर प्रसाद से 6 फरवरी 2018 को अपने नाम खरीदा था .

लाइव सिटीज के पास MOU की EXCLUSIVE कॉपी
लाइव सिटीज के पास MOU की EXCLUSIVE कॉपी

फिर 6 फरवरी को ही सरकार के साथ एमओयू साइन हुआ . देखने की बात है कि इस एमओयू में अनुमाया ह्यूमन रिसोर्सेज फाउंडेशन के प्रेसिडेंट का जिक्र तो आता है , लेकिन अब तक इनकी पहचान स्पष्ट नहीं है . पता नहीं क्यों, जांच एजेंसी अभी प्रेसिडेंट को सार्वजनिक नहीं कर रही है . ऐसे में, राजनीति यह होने लगी है कि मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार की संस्था के प्रेसिडेंट और गवर्निंग बॉडी के सदस्यों का नाम खुल जाएगा, तो बड़े-बड़े लोग बेनकाब हो जाएंगे .

सालाना भुगतान तय था मनीषा दयाल का

एमओयू में बहुत सारी बातों का जिक्र है . जहां तक आसरा होम चलाने के बदले भुगतान का सवाल है, स्पष्ट है कि मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार को साल में कुल 76 लाख रुपए मिलते . तय हुआ था कि आसरा होम में 50 लड़कियों/महिलाओं को रखा जाएगा . अधिक संख्या होने पर अधिक भुगतान का प्रावधान भी रखा गया है .

बुनियादी व्यवस्थाएं 50 लड़कियों/महिलाओं की करनी थी . आसरा होम में वैसी महिलाएं /लड़कियां रखी जाती हैं, जो मानसिक रूप से बीमार हों/अपने परिजनों के द्वारा छोड़ दी गई हो / भटकती हुई मिली हो . एमओयू यह भी स्पष्ट करता है कि कब कितना भुगतान किया जाएगा . इसके मुताबिक समय-समय पर मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार को भुगतान किया भी गया . किस मद में कितना खर्च किया जाना है, यह भी स्पष्ट है .

डेढ़ हजार रुपये में डॉक्टर मिलते हैं क्या ?

एमओयू को फिर से गौर से देखिए . पता चलेगा, सरकारी व्यवस्था भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए ही बनी है . आसरा होम में 50 महिलाओं/लड़कियों को रखा जाना है . माना गया है कि सभी बीमार-परेशान होंगे . इनके स्वास्थ्य की देखभाल की जानी है . इसके लिए डॉक्टर की जरुरत होगी .

पर तमाशा देखिए . एमओयू कहता है कि ₹1500 के खर्चे पर डॉक्टर रखे जाएंगे . डॉक्टर पार्ट टाइम होगा . अब थोड़ा सोचिए कि ₹1500 मासिक पर पटना में डॉक्टर कहां मिलेंगे . क्या आपको यह पता नहीं है कि पटना में थोड़े भी ठीक-ठाक डॉक्टरों की कंसल्टेंसी फी ₹500 से कम नहीं है . फिर जब 50 महिलाएं-लड़कियां आसरा होम में है, तब कोई ना कोई बीमार तो रहेगी . ऐसे में, कौन सा डॉक्टर ₹1500 के लिए महीने में बार-बार देखेगा .

तमाशा बस इतना ही नहीं है . एमओयू को एक बार और देख लीजिए . कहा गया है कि ₹500 दवा पर महीने में खर्च किए जाएंगे . क्या यह राशि ठीक-ठाक लगती है . हैरत की बात तो यह है कि डॉक्टर और दवा से अधिक खर्च दूसरे मदों में करने का प्रावधान किया गया है . बताने का आशय यह है कि जिस उद्देश्य से सरकार आसरा होम के संचालन का काम कर रही है, हकीकत में उसके मूल उद्देश्य को सबसे निचले पायदान पर रख दिया गया है . यहां यह जान लेना जरूरी है कि पटना आसरा होम की संवासिनों की मौत मामले में कंसल्टेंसी देने वाले डॉक्टर के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज है और वह पुलिस से भागे चल रहे हैं .

सुनील कुमार भूमिगत हो गए हैं

लाइव सिटीज की पड़ताल में यह खबर भी सामने आ रही है कि IAS सुनील कुमार अंडरग्राउंड हो गए हैं . जब से मीडिया में सुनील कुमार का नाम आना शुरु हुआ, जांच एजेंसियों की नजर उन पर टिकी . इसके बाद सुनील कुमार के ठौर-ठिकाने का पता नहीं चल पा रहा है . उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आता है . वैसे जांच एजेंसी का मानना है कि सुनील कुमार को जल्द ही ढूंढ निकाला जाएगा . बताते चलें कि 31 मई 2018 को समाज कल्याण विभाग में डायरेक्टर पद से ही सुनील रिटायर हो गए थे .

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