170 एकड़ में बनी देश की पहली गौशाला जहां रहती हैं 44 हजार गायें, यहां सारा दूध बछड़े ही पीते हैं

लाइव सिटीज डेस्क : आजकल भारत में धर्म को लेकर बहुत ज्यादा राजनीति देखने को मिल रही है. हिन्दू-मुस्लिम पर कई तरह के डिबेट कराए जा रहे हैं. गाय को लेकर भी कई तरह के विवाद बढ़ें हैं. कुछ लोगों का कहना है कि गाय को खाया जा सकता है तो कुछ का कहना है कि ये हमारी मां समान है इसलिए गौमांस पर प्रतिबंध लगाया जाए.



इन सभी विवादों से हटकर हम आज आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां भारतीय नस्ल के 44 हजार गाय रहती हैं. ये स्थान है मथुरा में, कामां से महज 8 किमी दूर स्थित है बरसाना जहां 170 एकड़ में देश की ऐसी पहली गौशाला है जहां एक ही स्थान पर भारतीय नस्ल के 44 हजार गौवंशीय पशु रहते हैं.

खास बात है कि यहां गाय के दूध का बछड़ों को पिलाने के अलावा कोई उपयोग नहीं होता. इस काम के लिए सरकार से कोई मदद तक नहीं ली जाती. इसमें करीब 18,600 गाय शामिल हैं. गोवंश को चारा डालने के लिए विदेश से मशीन लाई गई हैं. यहां किसी समय प्रतिदिन 2550 लीटर दूध प्रतिदिन निकाल कर करीब एक लाख रुपए में बेचा जाता था, लेकिन पिछले करीब 10 माह से गौशाला प्रबंधन ने दूध निकालना बंद कर दिया है.

दरअसल, माताजी गौशाला व मानमंदिर के संस्थापक रमेश बाबा ने बताया कि गौशाला परिसर से निकलते समय एक बछिया भूख से बिलख रही थी. तब से गाय का दूध नहीं निकालने का निर्णय लिया गया.

गायों के उपचार के लिए अलग से अस्पताल

गौशाला परिसर में 38 शैड हैं. हर शैड की क्षमता अलग-अलग है. किसी में दो हजार तो किसी में 1500 गायों को रखने की क्षमता है. सरकार ने गौशाला में ही पुलिस चौकी स्थापित कर दी है. गौशाला में ही गौ वंश के उपचार के लिए अलग से अस्पताल खोला गया है. यहां 8 डॉक्टर, कंपाउंडर की टीम 24 घंटे तैनात रहती है.

चारा बनाने के लिए 30 मशीनें, 200 श्रमिक

गौवंशीय पशुओं के लिए चारा बनाने के लिए 30 मशीनों को काम में लिया जाता है. 200 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, जबकि इतने ही ग्रामीण व श्रद्धालु प्रतिदिन नि:शुल्क सेवा देने आते हैं.