निर्भया कांड के 5 साल: भारत में आखिरी बार बलात्कार के मामले में फांसी कब हुई थी?

लाइव सिटीज डेस्क : निर्भया गैंगरेप केसः बलात्कार और हत्या का एक ऐसा जघन्य मामला, जिसने सड़क से लेकर संसद तक और देश से लेकर दुनिया तक, हर जगह तहलका मचा दिया था. 16 दिसंबर, 2012 के बाद देश में बलात्कार जैसे मामलों पर एक बार फिर नए सिरे से बहस छिड़ चुकी थी. लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या हवस का दंश इतनी बेरहमी से इंसानियत का कत्ल करने पर भी आमादा हो सकता है.



राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए कितनी सुरक्षित

दिल्ली में निर्भया कांड के पांच साल बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए कितनी सुरक्षित हुई है? इस भयानक हादसे के बाद राजधानी को ‘दुष्कर्म की राजधानी’ की संज्ञा दी जाने लगी. क्या महिलाओं के लिए दिल्ली अब सुरक्षित है? आपराधिक आंकड़ों में तो इसकी पुष्टि होती नहीं दिखती.

महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं

दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में रह रही और काम कर रहीं महिलाएं केंद्र और राज्य सरकारों के महिला सुरक्षा के दावों के विपरीत खुद को यहां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं.

दिल्ली में दुष्कर्म

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा 2016-17 के जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में अपराध की उच्चतम दर 160.4 फीसदी रही, जबकि इस दौरान अपराध की राष्ट्रीय औसत दर 55.2 फीसदी है. इस समीक्षाधीन अवधि में दिल्ली में दुष्कर्म (2,155 दुष्कर्म के मामले, 669 पीछा करने के मामले और 41 मामले घूरने) के लगभग 40 फीसदी मामले दर्ज हुए. विभिन्न पृष्ठभूमि की कुछ महिलाओं से इस बारे में बात की गई कि वे दिल्ली में कितना सुरक्षित महसूस करती हैं.

दिल्ली के 2012 के निर्भया बलात्कार कांड में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा. निचली अदालत ने मुकेश, पवन, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को मौत को सजा सुनाई थी जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था.

पूरे देश को स्तब्ध करने वाले निर्भया गैंग रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई. कोर्ट ने निर्भया गैंग रेप को पूरे देश में ‘सदमे की सुनामी’ बताते हुए कहा कि इस केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.

भारत में पिछली फांसी 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन को 

लेकिन इस बीच कई और भी फांसी दी गईं हैं जिसके बारे में शायद ही आपको पता हो. क्या आपको याद है भारत में अंतिम फांसी कब दी गई थी और किसको? भारत में पिछली फांसी 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन को जुलाई 2015 में दी गई थी.

बलात्कार के मामले में आखिरी बार फांसी 2004 में पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को

लेकिन बलात्कार के मामले में आखिरी बार फांसी 2004 में पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को दी गई थी. कोलकाता में एक 15 वर्षीय स्कूली छात्रा के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मुजरिम धनंजय चटर्जी को 14 अगस्त 2004 को तड़के साढ़े चार बजे फांसी पर लटका दिया गया था. 14 साल तक चले मुकदमे और विभिन्न अपीलों और याचिकाओं को ठुकराए जाने के बाद धनंजय को कोलकाता की अलीपुर जेल में फांसी दे दी गई थी.

धनंजय को अलीपुर जेल में फांसी के फंदे पर करीब आधे घंटे तक लटकाए रखा गया जिसके बाद उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया. कोलकाता के टॉलीगंज के रहने वाले जल्लाद नाटा मलिक ने धनंजय को फांसी देने का काम अंजाम दिया था.

धनंजय को जब फांसी की सजा सुनाई गई थी, उस समय पश्चिम बंगाल में कोई भी जल्लाद नहीं था, क्योंकि मलिक इससे कुछ महीने पूर्व ही सेवानिवृत्त हो गए थे.

धनंजय को फांसी देने के लिए राज्य सरकार ने नाटा से संपर्क साधा, लेकिन मलिक ने दोबारा जल्लाद बनने के बदले अपने बेटे को सरकारी नौकरी देने की शर्त रखी.

सरकार ने मलिक की शर्त मानी और फिर वह धनंजय को फांसी पर लटकाने के लिए तैयार हुए. दिसंबर 2009 में नाटा मलिक का कोलकाता में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था.