केंद्रीय मंत्री ने कहा – हिन्दुओं द्वारा अस्थि विसर्जन से प्रदूषित हो रही गंगा

लाइव सिटीज डेस्क : गंगा में बढ़ते प्रदूषण की एक वजह हिन्दुओं द्वारा इसमें अस्थियों का विसर्जन भी है. यह बयान केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने दिया है. उन्होंने कहा है कि अस्थि विसर्जन से गंगा प्रदूषित हो रही हैं. उत्तर प्रदेश के बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह ने कहा कि हिंदुओं को अस्थियों के गंगा में प्रवाह को रोकने के लिए इसके विकल्प तलाशने चाहिए.

केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ एक समारोह के दौरान ये बात कही. गंगा में प्रदूषण रोकने के सूझाव के तौर पर सत्यपाल सिंह ने कहा कि अस्थियों को जमीन पर इकट्ठा करके पूर्वजों के नाम का पौधा लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि परिस्थिति को देखते हुए मैं सभी से अपील करता हूं कि गंगा में प्रवाहित करने के बजाय अस्थियों को किसी जमीन पर एक स्थान पर एकत्र के उसके ऊपर पौधे लगाए जाएं. ताकि आने वाली पीढ़ी उस पौधे में अपने पूर्वजों की छवि देख सकें.



उन्होंने पुजारियों से अपील की कि वे गंगा की सफाई को लेकर जागरुकता फैलाएं. साथ ही महामंडलेश्वरों को जल समाधि के बजाए दाह संस्कार करने की सलाह दी है.

इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि गोमुख से गंगासागर तक गंगा के 2500 किमी के प्रवाह को अविरल व निर्मल बनाए रखने के लिए समाज के हरेक वर्ग को आगे आना चाहिए.

CAG ने उठाये हैं सवाल

मालूम हो कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी नमामि गंगे कार्यक्रम में पिछले तीन साल के दौरान वित्तीय प्रबंधन, योजना और क्रियान्वयन में खामियों को लेकर सवाल उठाए हैं. आडिट में यह तथ्य सामने आया है कि 2014-15 से 2016-17 के दौरान फंड का कम इस्तेमाल होने तथा परियोजनाओं में विलंब तथा लक्ष्यों की प्राप्ति में खामियां सामने आई हैं. बताया गया कि स्वच्छ गंगा कोष के पास 31 मार्च, 2017 तक 198.14 करोड़ रुपये थे जिसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका.