बात जब बिहार की अस्मिता की आयी तो एक साथ हो गए बिहार के ये नेता, TMC और DMK नेताओं को दिखा दिया आइना

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बात जब बिहार की अस्मिता की आयी तो सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता दलगत भावना से उपर उठकर एक साथ हो गए. बीजेपी, जेडीयू, हम और आरजेडी के नेता ने एक सुर में टीएमसी और डीएमके नेताओं के ‘बिहारी गुंडा’ और ‘बिहारियों के पास ज्यादा दिमाग नहीं होता’ वाले बयान की पूरजोर विरोध किया.

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि TMC के नेता राजनीति में लंपट संस्कृति से अपनी राजनीति चमका रहे हैं- ‘बिहार ज्ञान की भूमि रही है, चंद्रगुप्त और चाणक्य की भूमि रही है. हमारी अस्मिता को चुनौती देने की ताकत किसी में नहीं है. लोकतंत्र के मंदिर में भाषाई लंपट संस्कृति से संवाद करना राजनीति की निकृष्टता है. वहीं, DMK के नेता केएन नेहरू पर हमला करते हुए नीरज कुमार ने कहा पहले तमिलनाडु और बिहार के अधिकारियों में तुलना कर लें कि कौन ज्यादा बेहतर है?. बिहार के युवा अपने प्रतिभा के बल पर कहीं भी नौकरी लेते हैं. देश में कितने IAS और IPS हैं, इसकी तुलना भी तमिलनाडु से कर लें. बिहारी मेधा को कोई चुनौती नहीं दे सकता है’.

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया पर TMC सांसद महुआ मोइत्रा से कहा कि जब आपके सहयोगी ”राजद” की सरकार थी तो सत्ता संरक्षित गुंडागर्दी के कारण बिहारियों को “बिहारी गुंडा” जैसे शब्दों का सामना करना पडता था. आज बिहार में नीतीश कुमार के सुशासन की सरकार है और बिहारी शब्द सम्मान का शब्द है. वैसे आपको बंगाल की गुंडागर्दी मुबारक.

टीएमसी और डीएमके नेताओं के बयान की भर्त्सना करते हुए बीजेपी नेता व मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बयान देने वालों को शायद मालूम नहीं कि बिहारी स्वाभिमानी होते हैं. इस प्रकार के बयान की स्वस्थ लोकतंत्र में कहीं भी जगह नहीं है. ऐसे बयान की जितनी निंदा की जाए उतना कम होगा.

इधर RJD के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा कि आज भारत की कल्पना की जा रही है तो उसमें बिहार है. यदि बिहार नहीं है तो भारत नहीं है. लोगों को बिहार का सम्मान करना चाहिए और करना ही होगा. बिहार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बिहार के लोग यदि बिहार में ही रहकर अपना काम करने लगेंगे, तो दूसरे राज्य के लोग भुखमरी के कगार पर आ जाएंगे. बिहार के लोगों को सम्मान चाहिए और बिहार के लोगों को जो सम्मान देता है उसके लिए बिहारी जान भी दे सकते हैं.

उन्होंने कहा कि लालू यादव ने रेलवे में बेहतर काम किया था. उन्होंने घाटे में चल रहे रेलवे को मुनाफे में पहुंचाया था. लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए हर राज्य के लिए काम किया था. दूसरे राज्यों के लोगों को अपने मन से यह अवधारणा निकाल देना चाहिए. यदि बिहार के लोग उनके राज्यों में काम नहीं करेंगे तो उनके राज्य का विकास रुक जाएगा.