साइकिल से ऑफिस जाने वाले इस IPS अफसर ने किया शिव तांडव, लोग डांस देख रह गए दंग

लाइव सिटीज डेस्क : देश की बागडोर असल मायने में अफसरों के हाथ में होती है. यदि नौकरशाही दुरुस्त हो तो कानून-व्यवस्था चाकचौबंद रहती है. जिस तरह से भ्रष्टाचार का दीमक नौकरशाही को खोखला किए जा रहा है, लोगों का उससे विश्वास उठता जा रहा है. कुछ ऐसे भी IAS और IPS अफसर हैं, जो अपनी साख बचाए हुए हैं. उनके कारनामे आज मिसाल के तौर पर पेश किए जा रहे हैं. इन्हीं में से एक हैं डीसी सागर जो अपनी जांबाजी और फिटनेस की वजह से चर्चा में बने रहते हैं.

1992 बैच के IPS अफसर डीसी सागर अपनी फिटनेस को लेकर पूरे डिपार्टमेंट के लिए मिसाल बने हुए हैं. डीसी सागर मध्य प्रदेश के नक्सली इलाके बालाघाट रेंज के IG पद पर तैनात रहने के बाद वे अभी ADGP (टेक्निकल सर्विसेस) पुलिस मुख्यालय में हैं.

इन दिनों डीसी सागर का चर्चा में बने रहने की वजह ये है. भोपाल में IPS मीट के अंतर्गत पुलिस ऑफिसर्स मेस में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ADGP डीसी सागर ने शिव तांडव की प्रस्तुति दी.

बता दें कि पूरे शरीर पर नीले रंग, गले में माला पहने डीसी सागर ने किसी मंझे हुए कलाकार की तरह ऊर्जा से लबरेज इस प्रस्तुति को पेश किया.

इसी कड़ी में अन्य अधिकारियों ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी. राजस्थान के कालबेलिया, भवई, चरी जैसे नृत्यों का देर रात तक अतिथियों ने आनंद उठाया. वहीं एक कलाकार ने तलवार के ऊपर खड़े होकर नृत्य किया.

बता दें कि डीसी सागर पुलिस डिपार्टमेंट में सबसे फिट अफसर में आते हैं. उनका मानना है कि सिर्फ नैचुरल तरीके से एक्सरसाइज, रनिंग और सही डाइट लेने से गठीला शरीर और सही फिटनेस पा सकते हैं.

पुलिसिंग में LLB का सही यूज करने बने IPS

ADGP सागर का जन्म UP के बुलंदशहर में हुआ था. उनके पिता लखनऊ आर्मी में थे और मां हाऊस वाइफ थीं. उनकी स्कूलिंग तमिलनाडू, दिल्ली और जम्मू में हुई. दिल्ली के हंसराज कॉलेज से हिस्ट्री ऑनर्स के बाद उन्होंने LLB की भी पढ़ाई की.

LLB करने का उद्देश्य ये था, कि वे पुलिसिंग में इसका सही तरह से प्रयोग कर सकें और समझ सकें कि किस मुताबिक तरह लॉ का यूज किया जा सकता है.

इसके बाद वे 1992 बैच में IPS बने और मसूरी में ट्रेनिंग करने के बाद पहली पोस्टिंग बतौर SDOP नीमच में ज्वाइन की. ADGP सागर मानते हैं कि कर्म ही पूजा नहीं, बल्कि जायज कर्म पूजा है.

सागर फील्ड पर साइकिल का खूब इस्तेमाल करते रहे हैं

सागर ने कहा था, ‘साइकिल से गश्त करने से पुलिस वाले बीट में ज्यादा समय बिता सकते हैं, पतली गलियों में भी आसानी से घूम सकते हैं. साथ ही अपराधियों को गाड़ी की आवाज सुनकर भागने का मौका नहीं मिलता.

इससे काम में आसानी भी होती है और पर्यावरण की रक्षा भी होती है.’

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