नोटबंदी, जीएसटी के साथ मोदी-जेटली के बारे में भी बड़ा खुलासा कर सकते है पूर्व सीईए

ARVIND PANGARIYA
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पटना. भारत सरकार में 2015 से 2017 तक मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) रहे अरविंद सुब्रमण्यन की एक नइ्र किताब जल्द हीं मार्केट में आने को हैं. आपको बता दे कि उनकी ये किताब वैसे तो नवंबर में रिलीज होगी लेकिन इसे लेकर कई तरह के कयास लगने शुरू हो चुके हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि इस किताब से मोदी-जेटली का कच्चा चिट्ठा, लोंगो के सामने आ सकता है. बताया जा रहा है कि वे अपनी नई किताब में अपने कार्यकाल में हुए घटनाक्रमों को लेकर कई गुप्त राज खेल सकते हैं.

आपको बता दे कि अरविंद सुब्रमण्यन के कार्यकाल में हीं देश में आर्थिक सुधार को लेकर दो बड़े कदम नोटबंदी (500 रुपये और 1,000 रुपये के उच्च मूल्य वाले नोट को चलन से बाहर किया गया) ओर इसके बाद वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को लागू किया गया. ऐसी कयासें लग रहीं है की इन दोनो आर्थिक सुधारो को लेकर वे अपनी किताब में कुछ बड़ा खुलासा कर सकते है.

पूर्व आर्थिक सलाहकार की ये किताब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्रकासित करेंगी. पेंगुइन के अनुसार अरविंद सुब्रमण्यन की यह किताब उनके सीईए 2014 से लेकर 2018 तक रोलर-कॉस्टर की भांति रही उनकी यात्रा वृत्तांत को बारीकी से लोगों के सामने पेश किया जाएगा. जिनमें मोदी-जेटली की अर्थव्यवस्था की चुनौतियों की जानकारी दी जाएगी. अपने एक बयान में प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडियाकहा है कि “अरविंद सुब्रमण्यन की यह किताब सत्ता के शिखर पर नीति निर्माण की उपलब्धियों और चुनौतियों को सरलता से उद्घाटित करेगी.”

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इस किताब के बारे में बताते हुए पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के साहित्यिक प्रकाशन की प्रधान संपादक मेरु गोखले की माने तो “वैश्विक शक्ति के संतुलन में बदलाव पर उनकी रचना में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सुब्रमण्यन के अनुभव जानने को मिलेंगे. उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को नजदीक देखा व समझा है. उनके समय में काफी कुछ हुआ, जिनसे हमारा रोज का साबका है. अगर हम एक नागरिक के तौर पर अपने देश को जानना चाहते हैं तो हमें यह किताब पढ़नी चाहिए.”

वहीं अपनी इस किताब को लेकर अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा, “मैं भारत के संबंध में अपनी सोच व अनुभव साझा करने को लेकर उत्साहित हूं.” सुब्रमण्यन इस समय हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में अतिथि प्राध्यापक हैं और पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनोमिक्स में सीनियर फेलो हैं.

 

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