आज से मिथुन राशि में मंगल- राहु का साथ होने से बन रहा अंगारक योग : डॉ श्रीपति त्रिपाठी

ज्योतिषीय विश्लेषक, डॉ श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिर्विद

 लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क:  आज से मंगल और राहु मिथुन राशि में अंगारक योग बना रहे हैं. कुंडली के 12 भावों में इस योग के प्रभाव भी अलग-अलग हो सकते हैं. कुंडली में अंगारक योग के अशुभ फल तभी प्राप्त होते हैं जब इस योग का निर्माण करने वाले मंगल, राहु या केतु दोनों ही अशुभ स्थान में हों. इसके अलावा यदि कुंडली में मंगल तथा राहु- केतु में से कोई भी शुभ स्थान में है तो जातक के जीवन पर अधिक नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. लाल किताब में अंगारक योग को पागल हाथी या बिगड़ा शेर का नाम दिया गया है.

 

अंगारक योग, जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है यह अग्नि का कारक है. कुंडली में इस योग के बनने पर जातक क्रोध और निर्णय न कर पाने के असमंजस में फंसा रहता है. अंगारक योग के कारण क्रोध, अग्निभय, दुर्घटना, रक्त से संबंधित रोग और स्किन की समस्याएं मुख्य रूप से होती हैं. अंगारक योग शुभ और अशुभ दोनों तरह का फल देने वाला होता है. कुंडली में इस योग के बनने पर जातक अपने परिश्रम से नाम और पैसा कमाता है. इस योग के प्रभाव में व्यक्ति के जीवन में कई उतार- चढ़ाव आते हैं.

 

ग्रह हमेशा एक- दूसरे के साथ युति में आते रहते हैं, लेकिन हर बार यह नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन मंगल और राहु की युति कई बार परेशानी का सबब बन जाती है. जब भी दोनों अशुभ घर में होते हैं, परेशानी उत्पन्न हो ती है. यही नहीं कुंडली में मंगल जब राहु या केतु के साथ होता है तो अंगारक योग बनता है.

 

मंगल और राहु की युति से नुकसान होने के साथ ही झगड़ा, दुर्घटना, तनाव और कई तरह की परेशानियां होती हैं. ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़ा, हथियार, दुर्घटना, अग्नि, विद्युत आदि का तो राहु को आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षडयंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसी प्रवृत्ति, बुरे विचार, छल-कपट, और बुरी आदतों का कारक ग्रह माना गया है. यही कारण है कि ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को अधिक नकारात्मक और दुष्परिणाम देने वाला योग माना गया है.

मंगल और राहु कुंडली के किसी भी घर में साथ हो, तो अंगारक योग बनता है. यह योग अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देने वाला है. हालांकि कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा है, उस भाव को ये पीड़ित कर देते हैं. इससे व्यक्ति के जीवन में लड़ाई-झगड़े की स्थिति बनी रहती है. अंगारक योग के कारण व्यक्ति का स्वभाव आक्रामक, हिंसक तथा नकारात्मक हो जाता है. अपने भाइयों, मित्रों तथा अन्य रिश्तेदारों के साथ भी संबंध भी खराब हो जाते हैं. धन संबंधित परेशानियां भी बनी रहती है. अगर किसी महिला की कुंडली में यह योग हो तो उसे संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती है. इस योग के शांति के उपाय न करने पर लंबे समय तक परेशानियों से जूझना पड़ सकता है.

मंगल-राहु युति (अंगारक दोष) का राशियों पर प्रभाव

मकर राशि- मकर राशि में मंगल और राहु के युति का प्रभाव सबसे अच्छा होता है, जहां मंगल उच्च का होता है और राहु उच्च राशि के मंगल का परिणाम देगा. इसके प्रभाव से व्यक्ति काफी परिश्रमी होगा और हमेशा कानून के तहत काम करता रहेगा.

मेष, सिंह, धनु और मीन राशि– इन राशियों में, मंगल बेहतर स्थिति में होगा और राहु मंगल को अधिक मजबूत बना देगा. ऐसा व्यक्ति साहसी और सक्रिय होगा. उसकी इच्छा शक्ति उच्च स्तर की होगी और उसके कार्य अच्छी तरह से निर्देशित होंगे.

वृश्चिक राशि- यहां मंगल स्व राशि में है, लेकिन राहु की उपस्थिति का अर्थ है कि व्यक्ति के जीवन में कुछ अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव होंगे. लेकिन एक बात यह है कि मंगल की उपस्थिति इन सभी उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए साहस और इच्छा शक्ति प्रदान करेगी. रहस्य विज्ञान में यह व्यक्ति बहुत अच्छा हो सकता है.

मिथुन, कन्या, और कुंभ राशि – यहां मंगल शत्रु राशि में है, इसलिए व्यक्ति के पास कार्य करने संबंधी सही विचार या दिशा नहीं हो सकती है.

नुकसान- अंगारक योग के कारण जातक का स्वभाव आक्रामक, हिंसक तथा नकारात्मक हो जाता है तथा इस योग के प्रभाव में जातक के अपने मित्रों तथा अन्य संबंधियों से अनबन रहती है. अंगारक योग होने से धन की कमी रहती है. इसके प्रभाव में जातक की दुर्घटना की संभावना होती है. वह रोगों से ग्रस्त रहता है एवं उसके शत्रु उन पर काले जादू का प्रयोग करते हैं. व्यापार और वैवाहिक जीवन पर भी अंगारक योग का बुरा प्रभाव पड़ता है.

उपाय- इस योग के प्रभाव को कम करने के लिए मंगलवार के दिन व्रत रखने से लाभ होगा. इसके अलावा भगवान शिव के पुत्र कुमार कार्तिकेय की आराधना करें. हनुमान जी की आराधना करने से ये दोनों ग्रह पीड़ामुक्त होते हैं.  यह एक उत्तम उपाय है. राहु के बीज मंत्र का उच्चारण करना लाभकारी होगा. मंगल और राहु की शांति के लिए निर्दिष्ट दान करना लाभकारी होता है.

आंवारा कुत्‍तों को मीठी रोटी खिलाएं. घर पर राहु ग्रह की शांति हेतु पूजा रखें. चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में देवी लक्ष्‍मी की पूजा करें. जातक को मेडिटेशन से लाभ होगा एवं किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें. सत्‍संग का आयोजन करें और अपने गुरु को घर पर बुलाएं. किसी धार्मिक स्‍थल जाकर भगवान की आराधना करें. रोज़ शाम को घर में दीया जलाएं.

लेखक: ज्योतिषीय विश्लेषक, डॉ श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिर्विद

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