भारत का एक ऐसा गांव जो बन चुका है 7 लाख गांवों के लिए आदर्श गांव, सूरत व सीरत दोनों बदल गई

लाइव सिटीज डेस्क : देश के कई गांव और शहर पानी, बिजली व सड़क जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं लेकिन गुजरात का पुंसरी गांव सुविधाओं की वजह से देश के सात लाख गांवों के लिए आदर्श बन गया है. सीसीटीवी, वाई-फाई, कम्यूनिटी रेडियो, सफाई व्यवस्था, अपनी बस सेवा और आरओ वाटर प्लांट केकारण पुंसरी शहरों को भी मात दे रहा है.

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में सांसद आदर्श ग्राम योजना के उद्घाटन के मौके पर जिस पुंसरी गांव का जिक्र किया वह गुजरात की राजधानी गांधीनगर से 35 किमी दूर साबरकांठा जिले में हैं. उस गांव में देशभर से आला अधिकारियों, सामाजिक संगठनों व ग्रामीण विकास में रुचि रखने वाली एजेंसियों का आना जाना बढ़ गया है. कुछ साल पहले पुसंरी भी आम गांवों जैसा ही था लेकिन युवा सरपंच हिमांशु पटेल के कुछ कर गुजरने की जिद ने आज गांव की सूरत व सीरत दोनों बदल दी है.

केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं से हर ग्राम पंचायत को तीन से पांच करोड़ रुपये मिलते हैं लेकिन कुछ गांव ही उस पैसे का सदुपयोग कर पाते हैं. पुंसरी पंचायत के पास पांच साल पहले 30 लाख 40 हजार रुपये की जमा पूंजी थी. अब उसके खाते में 45 लाख रुपये हैं. इसके अलावा गांव में सीसी रोड, चार रुपये में 20 लीटर मिनरल वाटर, कम्यूनिटी रेडियो जिस पर आवश्यसक सूचना के साथ सुबह शाम भजन सुनाए जाते हैं. गांव से बाहर स्कूल जाने वाले बच्चों, दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए पंचायत की बस सेवा भी है.

सरपंच हिमांशु भाई ने पद संभालते ही सबसे पहले सेनीटेशन सुविधा पर जोर दिया इसके साथ सुरक्षा व मॉनिटरिंग के लिए सीसीटीवी लगाए. बिजली के खंभों पर नंबर डाल दिए ताकि जहां भी तकनीकी खराबी हो शिकायत में नंबर लिखने पर समस्याद का समाधान तुरंत हो सके. शिक्षा, सफाई व्यवस्था, महिला जागरुकता में भी पुंसरी खूब आगे है.

ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिसिटी

पंचायत ईको फ्रेंडली इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन के लिए बायो इलेक्ट्रिसिटी प्लांट लगा रही है जिससे गांव के 12 सौ घरों में से 250 को बिजली मिल सकेगी. राज्य सरकार ने प्लांट के लिए 40 लाख रुपये मंजूर कर दिए हैं.

एलईडी स्ट्रीट लाइट से घटेगा बिल

छह हजार की आबादी वाले गांव में 22 लाख रु की लागत से 450 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी. इससे दो माह का बिजली बिल 55 हजार से घटकर 22 हजार रुपये होने की उम्मीद है.

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