जानिए कौन हैं बोहरा समुदाय के मुस्लिम, जिनकी दरबार में आज पहुंचे थे पीएम नरेंद्र मोदी

लाइव सिटीज डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इंदौर में बोहरा समाज के एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए पहुंचे. पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी के बीच आना हमेशा मुझे एक प्रेरक अवसर देता है और काफी सुखद अनुभव देता है. उन्होंने यहां माणिकबाग स्थित सैफी मस्जिद में कहा सैयदना साहब ने समाज को जीने की सीख दी. बोहरा समाज दुनिया को भारत की इस ताकत से परिचित करा रहा है. शांति-सद्भाव, सत्याग्रह और राष्ट्रभक्ति के प्रति बोहरा समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

पीएम का राजनीतिक सन्देश

उन्‍होंने कहा, ‘मेरा सौभाग्य है कि आप सभी का साथ और विश्वास मेरे साथ है. जन्मदिन के पहले ही आपने मुझे देशहित के लिए दुआएं दी. मैं जब गुजरात रहा तो बोहरा समाज ने मेरा साथ दिया और यहां इस पवित्र मंच से भी मुझे इतना प्यार मिला है. दांड़ी यात्रा के दौरान पूज्य बापू महात्मा गांधी सैफुद्दीन जी के घर रुके थे, दोनों शांति के लिए प्रतिबद्ध थे.’ पीएम नरेंद्र मोदी के इस दौरे को मध्य प्रदेश में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पीएम इस यात्रा के जरिए संदेश भी देना चाहते हैं.

कौन होते हैं बोहरा मुस्लिम

मुस्लिमों को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है. मगर शिया और सुन्नियों के अलावा इस्लाम को मानने वाले लोग 72 फिरकों में बंटे हुए हैं. इन्हीं में से एक हैं बोहरा मुस्लिम. बोहरा शिया और सुन्नी दोनों होते हैं. सुन्नी बोहरा हनफी इस्लामिक कानून को मानते हैं. वहीं दाऊदी बोहरा मान्यताओं में शियाओं के करीब होते हैं. बोहरा समुदाय अपनी सफाई पसंदगी और पर्यावरण रक्षा की पहलों के लिए भी जाना जाता है. चैरिटेबल ट्रस्ट बुरहानी फाउंडेशन इंडिया 1992 से ही बर्बादी रोकने, रिसाइकलिंग और प्रकृति संरक्षण के लिए काम कर रहा है. दाऊदी बोहरा समुदाय काफी समृद्ध, संभ्रांत और पढ़ा-लिखा समुदाय है.

कहां-कहां बसे हैं बोहरा मुस्लिम

बोहरा समुदाय की भारत में लाखों की आबादी है. ये खुद को कई मामलों में देश के बाकी मुस्लिमों से अलग मानते हैं. दाऊदी बोहरा मुख्यत: गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, जामनगर, राजकोट, दाहोद, और महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे व नागपुर, राजस्थान के उदयपुर व भीलवाड़ा और मध्य प्रदेश के उज्जैन, इन्दौर, शाजापुर, जैसे शहरों और कोलकाता व चैन्नै में बसते हैं. पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, दुबई, ईराक, यमन व सऊदी अरब में भी उनकी अच्छी तादाद है. मुंबई में इनका पहला आगमन करीब ढाई सौ वर्ष पहले हुआ.

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