अब लंदन में दिखेगा भारत के समोसे का जलवा, 9 से 13 अप्रैल को मनाया जा रहा समोसा सप्ताह

लाइव सिटीज डेस्क : भारत का समोसा अब यहां तक सीमित नहीं है बल्कि ग्लोबल हो चुका है. आप सुबह की शुरूआत चाय-समोसे से करें या शाम की चाय समोसे के साथ लें, आपके लिए ये आम बात होगी, लेकिन ब्रिटेन के लिए समोसे किसी अनोखी डिश से कम नहीं है. समोसे के इसी अनोखेपन की वजह से ब्रिटेन में पहला समोसा वीक शुरू होने जा रहा है. ब्रिटेन के 6 शहरों में अगले महीने पहले ‘नेशनल समोसा वीक’ का आयोजन होना है. इसमें हिस्सा लेने वाले लोग इस लोकप्रिय भारतीय स्नैक को बनाएंगे, बेचेंगे और खाएंगे. इससे जुटे पैसे का इस्तेमाल चैरिटी में किया जाएगा.

यहां से आया आइडिया

समोसा सप्ताह का आयोजन 9 अप्रैल से 13 अप्रैल तक होगा. इसका आइडिया एक पत्रकार रोमेल गुलजार ने दिया था जिनका मानना है कि इस तिकोने स्नैक की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और यह ब्रिटेन में रहने वाले विभिन्न समुदायों के बीच एकता का माध्यम बन सकता है.

पाकिस्तानी मूल के गुलजार ने कहा, ‘भारतीय उपमहाद्वीप में वैसे तो यह एक टी टाइम स्नैक है लेकिन यह इससे कहीं ज्यादा है. हम समोसा वीक का इस्तेमाल दक्षिण एशिया की समृद्ध संस्कृति और फूड हेरिटेज की तरफ ध्यान आकृष्ट करने के लिए करना चाहते हैं.’

भारत कैसे पहुंचा समोसा

समोसे का इतिहास ईरान से जुड़ा हुआ माना जाता है, कहा जाता है समोसा फारसी भाषा के ‘संबोसाग’ से निकला शब्द है. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि गजनवी साम्राज्य के शाही दरबार में एक ‘नमकीन पेस्ट्री’ पेश की जाती थी, जिसमें कीमा, मीट और सूखा मेवा भरा जाता था.

इतिहासकारों के मुताबिक भारत में समोसा दो हजार साल पहले तब आया जब आर्य यहां आए. समोसा भारत में मध्य एशिया की पहाड़ियों से गुजरते हुए पहुंचा. भारत में आने के बाद समोसे में काफी बदलाव आया, भारत जो समोसा खाया जाता है, उसमें आलू के साथ मिर्च और स्वादिष्ट मसाले भरे जाते हैं. सोलहवीं सदी में पुर्तगालियों के द्वारा आलू लाए जाने के बाद समोसे में इसका इस्तेमाल शुरू हुआ.

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