बिहारियों के पलायन के बाद ‘सुरक्षा में कमी’ से जूझ रहा गुजरात, आधे से ज्यादा गार्डों ने छोड़ा

mIGRANTS-FROM-GUJRAT
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गांधीनगर/ पटना . गुजरात में 14 साल की मासूम बच्ची के साथ कथित बलात्कार मामले के बाद वहां से भागने को मजबूर किए गए बिहारियों और उत्तर भारतीयों के मामले में अब एक नाया मोड़ सामने आया है. एक तरफ जहां गुजरात में अप्रवासियों को खतरा मानते हुए उनपर हमले किए गए ओर उन्हे बाहर भगाया गया तो वहीं अब उत्तरभारतीयों के गुजरात छोड़ने के बाद गुजरात को सुरक्षा का खतरा महसूस होने लगा है. सीधे तौर पर कहे तो गुजरात में न्यूटन का तीसरा नियम का प्रैक्टिकल रूप दिख रहा है. बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद पलायन करनेवाले लोगो में बड़ी ज्यादा संख्या में निजी गार्ड के तौर पर काम करनेवाले लोग भी शामिल थे.

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इस बारे में ‘द प्रिंट की वेबसाइट पर छपी एक खबर के अनुसार भारत में निजी सुरक्षा गार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष निकाय ने इस बात का दावा किया है कि गुजरात छोड़ने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के अनुमानित 50,000 प्रवासियों में से अवासिये कॉलोनियों, मॉल, बैंकों, एटीएम और कार्यालय भवनों जैसे विभिन्न प्रतिष्ठानों की रक्षा करने वाले गार्डो की संख्या बहुत बड़ी है.

70 प्रतिशत से अधिक गार्डो ने छोड़ा गुजरात

सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (सीएपीएसआई) के अध्यक्ष कुंवर विक्रम सिंह ने इस बारे में बताया कि है कि “अहमदाबाद में, सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या गुजरात छोड़ कर चली गई है.” उन्होंने बताया कि सीएपीएसआई की गुजरात शाखा अभी भी इस बारे में आंकड़े जुटाने की में लगी है कि विस्थाापन में अभी तक कुल कितने सुरक्षा गार्ड वहां से अपने प्रदेश वापस चले गए हैं.

उन्होंने कहा कि हम स्थिति से निपटने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. सीएपीएसआई ने गैर गुजरातियों में नकारात्मकता को कम करने के लिए काम किए हैं. सिंह ने आंकड़े रखते हुए कहा कि गुजरात में 5 लाख से अधिक सुरक्षा गार्ड कार्यरत हैं, और इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक या 350,000 राज्य से बाहर के रहनेवाले हैं.

‘गुजरात नहीं छोड़ने का अनुरोध’

सीएपीएसआई द्वारा प्रस्तावित अनुमानों को मानें तो भारत में अनुमानित 25,000 सुरक्षा एजेंसियां हैं. वहीं देश में लगभग 8 मिलियन से ज्यादा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात है तो दुनिया में सबसे ज्यादा है. सिंह ने कहा कि सीएपीएसआई प्रवासी श्रमिकों को गुजरात नहीं छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने को लेकर आवासीय कल्याण संघ (आरडब्ल्यूए) के सदस्यों से बात कर रहा है.

सिंह ने कहा कि यहां से गए गैर—गुजरातियों में डर और भय है और वे दुबारा इस जगह पर आने से पहले सौबार सोचेगे. उन्होने कहा कि “यदि आपका सुरक्षा गार्ड हीं असुरक्षित महसूस कर रहा है तो यह बेहद हीं अवांछित है,”

आपको बता दे कि गुजरात में प्रवासियों के खिलाफ दो हफ्ते पहले सामने आई एक प्रवासी कथित बतात्कार की घटना के राज्य के 33 जिलों में से कम से कम सात से प्रवासियों पर हमलों की घटना सामने आई. प्रवासियों के प्रति हिंसा के लिए बलात्कार को तत्काल ट्रिगर माना जा सकता है लेकिन नौकरियों के मामले भी स्थानीय नाराजगी का कारण है.

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