रोस्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट का आ गया फैसला, कहा- CJI ही हैं इसके असली मास्टर

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दीपक मिश्रा का फाइल फोटो

लाइव सिटीज डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई को चुनौती देनेवाली याचिका को आज खारिज कर दिया. शुक्रवार को कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में यह आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने वरीय अधिवक्ता शांति भूषण की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि रोस्टर मामले में कोई विवाद है ही नहीं, सीजेआई ही रोस्टर के असली मास्टर हैं. इस आदेश के बाद से रोस्टर के असली मास्टर कौन हैं, को लेकर चल रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया.

दरअसल वरीय अधिवक्ता शांति भूषण ने चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया (सीजेआई) को सुप्रीम कोर्ट के मामलों के आवंटन का रोस्टर तैयार करने को लेकर चुनौती दी थी. इस मामले की सुनवाई 27 अप्रैल को जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने की थी. लेकिन, अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसी मामले में फैसले के बिंदु पर सुनवाई हुई.

जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने सीजेआई को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि न्यायाधीशों में सीनियर मोस्ट होने की वजह से उन्हें कुछ विशेष अधिकार प्राप्त है. कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ प्रशासनिक स्तर ही नहीं, न्यायिक स्तर पर भी सुधार के लिए काम किए जा रहे हैं.

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस मामले में फैसला सुरक्षित करने का विरोध किया था. अटार्नी जनरल ने उस समय बताया था कि मामलों के आवंटन के अधिकार में अन्य जजों को शामिल करने का प्रयास अव्यवस्था को बढ़ावा देगा. वहीं वरीय अधिवक्ता शांति भूषण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मास्टर ऑफ रोस्टर अनियंत्रित और निरंकुश विवेकाधीन शक्ति नहीं हो सकती, जिसके जरिए सीजेआई खास जजों की पीठ गठित कर सकें या खास जजों को मामले सौंप सकें. यह याचिका 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद दाखिल की गई थी. बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे. चेलमेश्वर (वर्तमान में सेवानिवृत्त), जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कूरियन जोसेफ ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट में स्थिति सही नहीं है.

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