SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – एकतरफा बयान पर गिरफ्तारी सभ्य समाज में अच्छी नहीं

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सुप्रीम कोर्ट

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : देश की शीर्ष अदालत में SC/ST एक्ट को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि अगर एकतरफा बयानों के आधार पर किसी नागरिक के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी रहे तो समझिए हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं. केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कोर्ट का पुराना आदेश बना रहेगा. इस मामले में कोर्ट छुट्टियों के बाद सुनवाई करेगा.

जस्टिस आदर्श गोयल ने इस दौरान कहा कि यहां तक कि संसद भी ऐसा कानून नहीं बना सकती जो नागरिकों के जीने के अधिकार का हनन करता हो. साथ ही बिना प्रक्रिया के पालन के सलाखों के पीछे डालता हो. कोर्ट ने ये आदेश अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार को सरंक्षण देने के लिए दिया है. कोर्ट ने कहा कि जीने के अधिकार के लिए किसी को इनकार नहीं किया जा सकता.

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जस्टिस गोयल ने कहा कि जो भी कानून है, उसे अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) के दायरे में देखना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी संबंधी वाद में इस बाबत व्यवस्था दी थी. अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का दायरा काफी बड़ा है और कानून को उसी चश्मे से देखना होगा. इस अधिकार को नहीं छीना जा सकता या कमतर नहीं किया जा सकता है. कोई इसे कम नहीं कर सकता, यहां तक कि संसद भी इस अधिकार से वंचित नहीं कर सकती.

इस मामले में अटॉनी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जीने का अधिकार बडा व्यापक है. इसमें रोजगार का अधिकार, शेल्टर भी मौलिक अधिकार हैं, लेकिन विकासशील देश के लिए सभी के मौलिक अधिकार पूरा करना संभव नहीं है. क्या सरकार सबको रोजगार दे सकती है?

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गौरतलब है कि SC/ST एक्ट को लेकर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मिली उन शिकायतों पर ही गिरफ्तारी से पहले जांच की जरूरत है जब शिकायत मनगढ़ंत या फर्जी लगे.

अदालत ने कहा कि हर शिकायत पर प्रारंभिक जांच की दरकार नहीं है. अदालत ने 20 मार्च के आदेश को रक्षात्मक कदम बताया है. 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत मिलने पर तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी से पहले प्रारंभिक जांच होनी चाहिए. इसके अलावा अन्य और निर्देश दिए गए थे.

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