कांग्रेस की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन, कहां बड़ी गलती कर बैठे राहुल गांधी… पढ़ें पूरी खबर

मोदी के राष्ट्रवाद के आगे कांग्रेस पूरी तरह से फेल

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: पश्चिम बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीटों पर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. शुरुआती रुझान में तृणमूल कांग्रेस जहां 24 सीटों पर आगे है, वहीं भाजपा ने राज्य में पहली बार शानदार प्रदर्शन करते हुए 17 लोकसभा सीटों पर बढ़त बना ली है.

पूरे देश में बीजेपी की लगभग 280 सीटों पर आती दिखाई दे रही है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पार्टी के मुख्यालय दोपहर 2 बजे तक पहुंचेंगे. वहीं शाम को पीएम मोदी पहुंचेंगे. दूसरी ओर कई राउंड की मतगणना के बाद अमेठी में राहुल गांधी पीछे चल रहे हैं. दूसरी ओर हरियाणा, गुजरात, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र में एनडीए लगभग क्लीन स्वीप के हालात में पहुंच गई. सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े बिहार और उत्तर प्रदेश से मिले हैं जहां महागठबंधन ने पूरी तरह से बीजेपी के आगे पूरी तरह से फेल हो गया है.

जिस तरह से उत्तर प्रदेश में बीजेपी आगे चल रही है सपा और बसपा के लिए बड़ी मुश्किल होगी. कर्नाटक में लोकसभा की 28 में से 23 सीटों पर भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे चल रही है. राजस्थान में लोकसभा चुनाव की मतगणना में भाजपा की अगुवाई वाला राजग सभी 25 सीटों पर आगे चल रहा है और सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक के रूझान में उसके लगभग 14 उम्मीदवारों की बढ़त एक लाख से अधिक मतों की हो गयी है. भीलवाड़ा सीट पर तो भाजपा प्रत्याशी की शुरुआती बढ़त तीन लाख से अधिक मतों की है. सवाल इस बात का क्या है कि ऐसी क्या वजहें हो सकती हैं कि पांच साल के सत्ता विरोधी लहर के बाद भी कांग्रेस या विपक्ष को जीत नसीब नहीं हुआ.

ऑपरेशन बालाकोट के बाद बीजेपी राष्ट्रवाद की लहर पर सवार हो गई जबकि कांग्रेस के कुछ इस पर सबूत मांगते नजर आए. मोदी ने इस चुनाव में सेना और बीजेपी की छवि को एक कर दिया और ऑपरेशन बालाकोट के बाद बीजेपी का विरोध मतलब सेना का विरोध हो गया और राहुल गांधी इस अवधारण को तोड़ नहीं पाए.

बीते 2 सालों से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील में पीएम मोदी पर सीधे घोटाले के आरोप लगाए और मंच से उन्होंने ‘चौकीदार चोर’ के नारे लगवाए. लेकिन पीएम मोदी ने इस आरोप का मुकाबला आक्रमक तरीके से किया और चौकीदार चोर नारे के जवाब में उन्होंने ‘मैं भी चौकीदार’ का नारा लगाया. अब ऐसा लग रहा है कि राहुल गांधी का सीधे पीएम मोदी पर घोटाले का आरोप लगाना जनता को पसंद नहीं आया.

पीएम मोदी के 5 सालों के कार्यकाल में किसी भी मंत्री पर एक भी घोटाले का दाग नहीं लगा. राफेल मुद्दे पर भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपने बयान पर सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी थी. इसका असर पर भी निश्चित तौर पर वोटरों पर जरूर हुआ होगा.

इस लोकसभा चुनाव की खास बात यह थी कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद भी जरूरी चीजों के दाम नहीं बढ़े. यूपीए को मजबूत करने की कवायद में कांग्रेस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई. केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस को गठबंधन का फायदा नहीं मिला. लेकिन उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस कोई गठबंधन नहीं कर पाई. हालांकि कांग्रेस को गठबंधन के बाद भी फायदा मिलता यह भी अपने एक सवाल है.

ऑपरेशन बालाकोट के बाद जहां देश राष्ट्रवाद की लहर पर सवार था वहीं कांग्रेस के घोषणापत्र में जम्मू- कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 में छेड़ाछाड़ नहीं और सेना को मिलने वाले आफास्पा को हटाने का जिक्र किया गया. जिसको पीएम मोदी ने जमकर मुद्दा बनाया.

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