ज्ञानोदय गुरुकुल के वर्कशॉप में छात्रों को बताये गए अपनी रूचि की पढ़ाई के फायदें

ज्ञानोदय गुरुकुल स्कूल के प्रांगण में प्रायोगिक कौशल व सैद्धांन्तिक विज्ञान के क्षेत्र में व प्रतिभा संवर्द्धन के उद्देश्य से एक दो दिवसीय (16 - 17 जनवरी 2019 ) POLLEX-T III वर्कशॉप का आयोजन किया गया

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : आईआईटी पटना व आईएपीटी -एपीएचओ सेल दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में  ज्ञानोदय गुरुकुल स्कूल के प्रांगण में प्रायोगिक कौशल व सैद्धांतिक  विज्ञान के क्षेत्र में व  प्रतिभा संवर्द्धन के उद्देश्य से एक दो दिवसीय (16 – 17 जनवरी 2019 ) POLLEX-T III  वर्कशॉप का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि अभयानंद,  आईआईटी कानपुर के पूर्व प्राध्यापक व सम्प्रति में मुम्बई के सेंटर फॉर एक्सेलेन्स इन बेसिक साइंसेस में राजा रामन्ना फेलो के पद पर कार्यरत व आईएपीटी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष विशिष्ठ अतिथि व बिहारी मिट्टी के लाल प्रो विजय अवधेश सिंह,  आईआईटी पटना के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोरंजन कर,  बिहार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रो राजमनी प्रसाद सिन्हा,  आईएपीटी – एपीएचओ सेल के राष्ट्रीय समन्वयक व दिल्ली विश्वविधालय के एसोसिएट प्राध्यापक प्रो रवि भट्टाचार्जी तथा ज्ञानोदय गुरुकुल स्कूल के  प्राचार्य डॉ. हिमांशु कुमार पाण्डेय के द्वारा दीप प्रज्जवलन करने के साथ हुई.

इस अवसर पर विद्यालय के छात्रों द्वारा अतिथियों के सम्मान में स्वागत गान प्रस्तुत किया गया.  इस वर्कशॉप में बिहार – झारखंड के  विभिन्न विद्यालयों व महाविद्दालयों से लगभग ढाई सौ से अधिक छात्रों,  शिक्षकों व उनके अभिभावकों ने भाग लिया.  छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अभयानंद ने छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार पढ़ाई करने की बात कही, जबकि विशिष्ठ अतिथि प्रो विजय सिंह ने समझकर व प्रायोगिक ज्ञान हासिल करने पर जोर दिया.

उन्हो़ने बिहारी प्रतिभा के उचित संवर्द्धन पर सबका ध्यान आकृष्ट कराया व प्रतिभागियों को विज्ञान में अपना प्रदर्शन बेहतर करने के कई गुर सिखाए. आईआईटी पटना के डॉ मनोरंजन कर ने छात्रों के समक्ष कई रुचिकर प्रायोगिक डेमोन्स्ट्रेशन किये. स्वागत भाषण को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ हिमांशु पाण्डेय ने सबों का स्वागत किया व प्रदेश में प्रायोगिक वैज्ञानिक बुनियाद की मजबूती व संबंधित सैद्धांतिक आधारभूत संरचनाओं के महत्व की तरफ़ लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया तथा कहा कि इनके बग़ैर भारत 21वीं सदी में आसानी से गौरवमय स्थान व अपना वाज़िब हक़ दुनिया में नहीं अर्जित कर पाएगा.

उन्हो़ने वैज्ञानिक शिक्षा में प्रयोग के महत्व को भी उजागर किया. कार्यशाला के प्रथम दिन आज छात्रों को प्रायोगिक कौशल की सैद्धांतिक व हैंड्स ऑन प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया जिसमें उन्हें कई प्रयोगों को कराया गया तथा इन सबों में बच्चों व शिक्षकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया.  प्रतिभागियों का आज एक डायग्नोस्टिक टेस्ट भी हुआ जिसका परिणाम कल अभिभावकों के सामने घोषित किया जाएगा. कार्यशाला को नारायण कॉलेज सीवान के प्राचार्य डॉ प्रमेन्द्र सिंह ने भी संबोधित किया व उन्होंने बताया कि आज के समय में शिक्षकों के लिए शिक्षण कार्य परंपरागत शिक्षण से बिल्कुल अलग और चुनौतीपूर्ण है व छात्रों को पठन पाठन के दौरान अधिक से प्रश्न स्वयं व प्रकृति से करने चाहिए. टेक्नोलॉजी के इस युग में बच्चे ज्यादा ही सक्रिय हो गए हैं.

उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति के मैनेजिंग ट्रस्टी विकास कुमार ने आगे जोड़ा कि छात्रों की मनोदशा का अनुमान लगाना सहज नहीं है.  इसके लिए शिक्षकों को आदर्श शिक्षक बनना होगा.  उन्हें अपने अन्दर वो सारी चीजें समेटना होगा जिससे विद्यार्थियों की जरूरते पूरी हो सके. कार्यशाला में प्रो विजय सिंह ने संबोधन में शिक्षकों के लिए इफेक्टिव टीचिंग में अनुशासन के साथ-साथ सीखने की प्रवृत्ति को जागृत करने पर बल दिया.

कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. पाण्डेय ने बताया कि इफेक्टिव व समेकित  शिक्षण उन्हीं शिक्षकों व छात्रों के लिए लाभकारी हो सकता है जो कक्षा में प्रवेश करने से पहले अपनी सारी रणनीति दुरुस्त किए रहते हैं.  उन्हो़ने आगे जोड़ा कि  अगर कोई शिक्षक अपनी सारी कक्षाओं में से किसी एक कक्षा की स्थिति भी परिवर्तित कर दे तो वह राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान होगा.

उद्घाटन कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन समिति की सचिव अभिलाषा ने वर्कशॉप में आज आए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन व वर्कशॉप के सफ़ल आयोजन व संचालन की कामना की  तथा भविष्य में भी विद्यालय में इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन की बात कही.

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