आश्‍वसान नहीं कार्रवाई चाहिए, वरना होगा आमरण अनशन : अनिल कुमार

पटना : जनतांत्रिक पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अनिल कुमार आगामी पंद्रह दिनों के अंदर पुराने शाहाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले NH-30 के पुनर्निर्माण की मांग करते हुए कहा कि उन्‍हें आश्‍वसान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए. वरना वे 15 दिन बाद से अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ आमरण अनशन करेंगे. श्री कुमार ने तीन दिवसीय शाहाबाद बचाओ पदयात्रा के बाद आज पटना में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि ये शाहाबाद का दुर्भाग्‍य है कि इस क्षेत्र से तीन केंद्रीय मंत्री और बिहार सरकार में चार मंत्री हैं, मगर फिर भी शाहाबाद की जनता की अनदेखी की जा रही है. यह काफी शर्मनाक है.

श्री कुमार ने कहा कि 21-23 दिसंबर को हमने पार्टी के हजारों कार्यकर्ता के साथ शाहाबाद में आरा से मोहनिया के बीच 120 किलोमीटर की पैदल यात्रा की, इस दौरान स्‍थानीय लोगों का पुरजोर सहयोग मिला. सभी ने एक स्‍वर में NH-30 के निर्माण के हक में हैं. उन्‍होंने केंद्र सरकार और राज्‍य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ केंद्र की सरकार कहती है कि वे हर दिन 250 किलोमीटर सड़क का निर्माण करवा रही है, जबकि दूसरी ओर राज्‍य सरकार कहती है कि 6 घंटे में कोई भी बिहार में एक छोर से दूसरे छोर तक जा सकता है.



मगर हकीकत ये है कि NH-30 पर महज 120 किलोमीटर की दूरी तय करने में छह घंटे लग जाते हैं. इस सड़क की जमीनी हकीकत ये है कि पता नहीं चलता है कि सड़क गड्ढे में है या गड्ढे में सड़क है. यह सड़क आज पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है, इसलिए हमारी मांग है कि 15 दिनों के अंदर इसका निर्माण कार्य शुरू हो वरना हम NH-30 के किनारे दिनारा में तब तक आमरण अनशन करेंगे, जब तक कि सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो जाता है.

श्री कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान राज्‍य के किसानों की बदहाल स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि आज सात सालों से किसानों के समर्थन मूल्‍य में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है जबकि महंगाई चरम पर है. सरकार अपने अधिकारियों और मंत्रियों का वेतन तो बढ़ा देती है, मगर किसानों का समर्थन मूल्‍य नहीं बढ़ा है. ये काफी चिंताजनक है. आश्‍चर्य होता है कि वे अपना जीवनयापन कैसे कर रहे हैं. इसलिए हमारी मांग है कि किसानों के लिए समर्थन मूल्‍य का निर्धारण वर्तमान समय के अनुसार हो.

इसके अलावा हमारी मांग है कि शाहाबाद में एक एम्‍स की स्‍थापना हो, ताकि यहां के लोग इलाज के लिए बनारस न जायें. आज इस क्षेत्र में एक भी अस्‍पताल नहीं, जिससे यहां के लोगों को इलाज के लिए यूपी जाना पड़ता है. हम बिहार के निवासी हैं और बिहार में इलाज कराना हमारा हक बनता है. मगर कोइलवर पुल की जाम और बदहाल सड़क की वजह से हम पटना इलाज के लिए नहीं जा पाते. इसलिए इन चारों जिलों को मिला कर एक एम्‍स का निर्माण जरूरी है.

श्री कुमार ने शाहाबाद को प्रमंडल का दर्जा देने के मांग को भी उठाया और कहा कि इस क्षेत्र में भोजपुरी भाषा बोली जाती है और हमारी आबादी भी काफी है. ऐसे में शाहाबाद को प्रमंडल का दर्जा मिलना ही चाहिए और हम इसे लेकर रहे रहेंगे. जब तक दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा. उन्‍होंने कहा कि बिहार में शिक्षा की स्थिति काफी बदतर है, मगर सरकार कहती है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम कर रही है. जबकि हकीकत ये है कि आज तक बिहार टेक्‍स्‍ट बुक छात्रों के बीच नहीं पहुंच पाई है. यह काफी शर्मनाक है.

बिहार में आज स्‍कूली शिक्षा के नाम पर लूट और भ्रष्‍टाचार चल रहा है. राज्‍य में उद्योग धंधे की हालत भी अच्‍छी नहीं है. बिहार में बाहर के लोग आकर काम कर रहे हैं, मगर यहां के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. वास्‍तव में सरकार नहीं चाहती है कि बिहार के लोग निर्माण के क्षेत्र में काम करें, क्‍योंकि इससे उनका भ्रष्‍टाचा उजागर हो जायेगा.

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उन्‍होंने कहा कि वास्‍तव में आज प्रदेश की स्थिति चिंताजनक है. मगर सरकार को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. सरकार के मुखिया नीतीश कुमार कभी प्रकाशोत्‍सव में तो कभी सत्‍याग्रह आंदोलन के नाम पर ऐशो आराम में डूबे हैं. इससे दुर्भाग्‍य की बात किसी भी राज्‍य के लिए और क्‍या हो सकती है. मगर हमारी इन सबका विरोध करेगी और बिहार व जनता के हक में लड़ाई जारी रखेगी, ताकि सही मायनों में राज्‍य में विकास सुनिश्चित हो सके. संवाददाता सम्‍मेलन में डॉ स्मिता शर्मा और संजय मंडल भी मौजूद रहे.