एनडीए से हमारे दल की दूरी का कोई कारण नहीं, यह सिर्फ मीडिया की अपनी बात – मांझी

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जीतन राम मांझी (फाइल फोटो)

पटना : 16 सूत्री मांग को लेकर बिहार सरकार के ध्यान आकर्षण में महाधरना करना राज्य की जनता के हित में है. कमियों को दूर कर जनता के बीच मजबूत कड़ी बनाने का प्रयास है. हमारा विरोधी दल से कोई कंचन नहीं है. गुरूवार को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा  के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक चैनल से साक्षात्कार में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि महाधरना कर हमने कोई हल्ला नहीं बोला. समाज में कई गलत मैसेज आ रहे हैं. शराबबंदी जैसे मामले में आज 71,000 लोग जेल में हैं, जिसमें 60 हजार लोग गरीब तबके के हैं. कुछ बेकसूर लोग जेल में हैं, यह हमारे लिए दुख की बात है. यह विरोध की नहीं समीक्षा की बात है. यह हम अवगत करा रहे हैं. गरीब को परेशानी हो रही है. शराबबंदी अच्छा कदम है पर गरीब परेशान हैं.

पत्रकार के सवाल के जवाब में मांझी ने कहा कि यह एनडीए से हमारे दल की दूरी का कोई कारण नहीं, यह सिर्फ मीडिया की अपनी बात हो सकती है.  हम एनडीए के पार्टनर हैं और आगे भी रहेंगे. मांझी ने रामचरितमानस के दोहे का जिक्र करते हुए कहा कि “सचिव वैद्य अरुमित्र जो प्रिय बोलहिं भय, आश, राज, धर्म, तन तीनकर बेगही होई हई नाश”. जिसका अर्थ है सचिव, मित्र और वैध अगर वह प्रिय बोलते हों तो राजधर्म और तन तीनों का नाश होता है.  हम पार्टनर हैं.  मित्र के नाते सही बात तो कहेंगे ही जिससे कि तीनों का नाश ना हो. बस यही हमारा सच्चे मित्र के नाते प्रयास है.

मांझी ने एक और सवाल के जवाब में कहा कि हमारा लालू प्रसाद से नजदीकी का कोई सवाल ही नहीं है.  हम गलती पर चुप बैठने वाले नहीं.  हम अपनी बातों से एनडीए के घटक दलों को अवगत कराते रहेंगे.  आज विरोधी दल बहुत सारी बातों को लेकर उसका लाभ उठा रहे हैं.  बस हमने सच बोलने की हिम्मत किया है.  हमने एनडीए की जहाज को डूबने से बचाने की हिम्मत की है क्योंकि हम भी इसी जहाज पर सवार हैं.

उन्होंने कहा कि हम नीतीश कुमार के साथ एक मित्र की तरह काम कर रहे हैं.  लालू यादव का और मेरी बात अलग अलग है.  उसे एक साथ जोड़ कर नहीं देखना चाहिए. मांझी ने कहा कि 16 सूत्री मांगों को लेकर एक डेलीगेशन भी मुख्यमंत्री से मिलेगा, जिससे कि एनडीए को फायदा हो. हमारी पार्टी के द्वारा अगले वर्ष 2018 में 8 अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में रैली करने जा रही है. जिसमें हम अपनी बातों को सरकार के हित में लाखों लाख लोगों से हाथ उठाकर समर्थन की बात करेंगे.  हम साफ बात और जनहित में काम करना चाहते हैं लेकिन मेरी बात को यदि कोई “जिनकी रही भावना” जैसी कहावत के अनुसार कोई गलत मतलब निकाल ले तो यह उनकी बात है, जिसके लिए मेरे दिल में कोई शिकायत नहीं है.

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