बिहार का एक कैदी ‘अच्छे व्यवहार’ की वजह से छूटा, फिर 2 मर्डर कर वापस उसी जेल में आ गया

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार में एक कैदी जेल से ‘अच्छे व्यवहार’ के कारण छूटा और फिर एक नहीं, बल्कि दो मर्डर कर वापस उसी जेल में लौट आया. ये मजाक की बात नहीं है. ऐसा ही एक मामला बिहार के औरंगाबाद जिले में सामने आया है. स्थानीय जेल में बंद एक कैदी पवन कुमार सिंह (उम्र – 27 वर्ष) ने रिहाई के बाद दो हत्याओं की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया. लेकिन कहते हैं न, खून का दाग पीछा नहीं छोड़ता. पवन जुर्म कर बच न सका और रिहाई के करीब डेढ़ माह के अंदर ही वापस उसी जेल में पहुंच गया.

इस घटना का अभियुक्त पवन कुमार सिंह 27 साल की उम्र में ही रंगदारी, हमला, आर्म्स एक्ट जैसे संगीन मामलों में सजायाफ्ता होकर जेल में सात साल के सश्रम कारावास की सजा काट रहा था. लेकिन जेल में उसके कथित अच्छे व्यवहार की वजह से इसी साल 2 अक्टूबर के दिन ‘दया स्वरूप’ उसे रिहा कर दिया गया था. लेकिन रिहाई के बाद ही उसने दो हत्याएं कर फिर से उसी जेल में अपनी वापसी सुनिश्चित कर ली. इसके बाद अब सवाल औरंगाबाद जेल प्रशासन पर भी उठने लगे हैं.

पत्नी की बेवफाई बनी वजह

एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार पवन जब रिहा होकर अपने घर गया. तब उसे अपनी पत्नी की बेवफाई की कहानियों का पता चला. पवन औरंगाबाद के नवीनगर इलाके का निवासी है. पवन को जानकारी मिली कि उसकी पत्नी का अफेयर मो. शफीक नाम के एक व्यक्ति से चल रहा है. शफीक पूर्व में पवन के साथ ही सासाराम की जेल में कई महीनों तक बंद रहा था. यह जानकारी मिलने के बाद पवन अब शफीक को ठिकाने लगाने की ताक में लग गया.

घटना के बारे में पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शफीक को ठिकाने लगाने की फ़िराक में लगे पवन को यह मौका जल्दी ही मिल गया. इसी माह 4 नवंबर को उसने शफीक और उसके एक साथी मो. गद्दी को एक गांव में साथ घूमते पकड़ लिया. उसने शफीक को मौके पर ही गोली मार दी और मो. गद्दी को एक नजदीकी पोखर में ले जाकर डूबा दिया. शफीक की पहचान कर उसके मोबाइल नंबर की सहायता से पुलिस पवन की पत्नी तक पहुंची और फिर उसे भी बीते 18 नवंबर को दबोच लिया.

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पवन को क्षमादान देने की जांच शुरू

पवन के इस तरह दोबारा अरेस्ट होने के बाद अब जेल अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है. वरीय अधिकारियों द्वारा शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पवन को क्षमादान देने में स्थानीय कोर्ट और जेल अधिकारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया. नियमों के अनुसार क्षमादान वैसे उम्रदराज कैदियों को दिया जाता है, जिन्होंने जेल में रहने के दौरान अच्छा व्यवहार रखा हो, और उनके खिलाफ कोई केस पेंडिंग न हो. जबकि पवन मात्र 27 साल की उम्र में संगीन आरोपों में सजायाफ्ता था और अभी उसके खिलाफ कई मामले पेंडिंग भी हैं.

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