छठ पूजा: भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य आज, इस महाव्रत से दूर हो जाती है सभी कष्ट

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: लोक आस्था के महापर्व आज घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्यदेवता को व्रती अर्घ्य देंगे और कल उदीयमान सूर्य की उपासना करेंगे. सोमवार की शाम को खरना पूजा के साथ ही छठव्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया है. मंगलवार को शाम का अर्घ्य व बुधवार को सुबह के अर्घ्य के बाद व्रती महिलाएं पारण करेंगी. ज्योतिषाचार्य प्रो. सदानंद झा ने बताया कि मनोवांछित फल पाने के लिए श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगे. बताया कि भागलपुर में 13 नवम्बर को सूर्यास्त का समय 4.54 बजे शाम एवं 14 नवम्बर को सूर्योदय का समय प्रात: 5.58 बजे है.

अर्घ्य के बाद पारण के साथ महापर्व छठ का समापन हो जाएगा. सुबह से खरना की तैयारी में जुटे छठव्रतियों ने मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर गुड़ से बनी खीर और घी लगी सोहारी तैयार कर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना कर ग्रहण किया. सुख-समृद्धि की कामना की. खरना के बाद आसपास के लोगों ने भी व्रतियों के घर पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया.

 

व्रतियों के साथ आम लोग अर्घ्य देकर छठ मैया से आशीष मांगेंगे. बुधवार 14 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. 36 घंटे के निर्जला व्रत में पुत्र एवं परिजनों के दीर्घायु और यशस्वी होने की कामना की जाएगी. छठ में अस्त और उदित होते सूर्य की पूजा होती है. उदित सूर्य एक नए सवेरे का प्रतीक है. अस्त होता हुआ सूर्य केवल विश्राम का प्रतीक है. इसलिए छठ पूजा के पहले दिन अस्त होते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य देते हैं.

केवल छठ ही ऐसा पर्व है जिसमें अस्त होते सूर्य की पूजा होती है. नदी के तट पर डूबते सूर्य को प्रणाम करना यह प्रदर्शित करता है कि कल फिर से सुबह होगी और नया दिन आएगा. गायत्री मंत्र भी सूर्य को ही समर्पित मंत्र है.  भगवान कृष्ण ने गीता में सूर्य और गायत्री मंत्र की महिमा बताई है.

13 नवंबर यानि आज सायंकाल प्रथम अर्घ्य 05 बजकर 25 मिनट पर दिया जाएगा. यह अर्घ्य ही सूर्य पूजा की शुरुआत है. प्रथम अर्घ्य के बाद अगली सुबह का अर्घ्य प्रातः कालीन उदित सूर्य का होता है. पानी में खड़े होकर यह अर्घ्य दिया जाता है. प्रथम अर्घ्य और द्वितीय अर्घ्य के बीच का समय ही तप का होता है. इसमें हम छठ माता को प्रसन्न करते हैं. यह अन्तराल प्रकृति को प्रसन्न करने का तथा उससे वर प्राप्त करने का है.

अर्घ्य मंत्र 

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा:

पटना सहित पूरे बिहार में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान घाटों पर तैनात हैं और प्रशासन अलर्ट पर है.

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