CM नीतीश ने देखा था एक टीला, अब वहां मिली 5500 साल पुरानी सभ्यता की जानकारी

पटना/नालंदा (संतोष कुमार) : शेखपुरा जिला अंतर्गत अरियरी प्रखंड के डीहा गांव में भ्रमण एवं विकास योजनाओं के निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक किले को खोज निकाला. डीहा गांव में घूमते हुए उन्होंने उंचाई एवं ढलान का अनुभव किया. उन्हें लगा कि यह कोई ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का स्थल हो सकता है. ऐतिहासिक विरासतो के प्रति प्रेम व स्वभाविक जिज्ञासावश उन्होंने इस टीले के बारे में विशेष जानकारी के लिए केपी जायसवाल शोध संस्थान को निर्देशित किया था.

इसके बाद शनिवार को एक्टिव हुए केपी जायसवाल शोध संस्थान के निदेशक विजय कुमार चौधरी ने इस टीले के अन्वेषण के लिये बिहार विरासत विकास समिति का एक अन्वेषक दल भेजा. टीम ने पाया कि यह कोई मामूली टीला नहीं है. चौधरी का प्रारंभिक अनुमान है कि टीले के गर्भ में ईसा से भी 3500 साल पहले की किसी सभ्यता की कहानी छुपी हुई है.



चौधरी के मुताबिक स्थल निरीक्षण के क्रम में अन्वेषक दल को दो ऐतिहासिक मृदभांड मिले. काला और लौह मृदभांड तथा दूसरा पॉलिश युक्त कृष्ण मृदभांड. दोनों मृदभांड ईसा पूर्व के हैं. नवपाषाण काल को ईसा से करीब 3500 साल पहले का युग माना जाता है.

अब बताया जा रहा है कि शेखपुरा जिले के फरपर गांव में नवपाषाण कालीन सभ्यता की निशानी उस टीले के नीचे मिल सकती है. यह ईसा से भी 3500 साल पुरानी सभ्यता है. विस्तृत शोध भी जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. मुख्यमंत्री के निर्देश पर 24 घंटे के भीतर मौके पर पहुंची केपी जायसवाल शोध संस्थान एवं बिहार विरासत विकास समिति की संयुक्त टीम ने कई नमूने संग्रह किए. पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अनंत आशुतोष वेदी के नेतृत्व में डीहा गांव के विभिन्न हिस्सों से पुरातात्विक महत्व के नमूने लिए हैं. टीम पुरानी मूर्तियों के टुकड़े, बर्तन एवं मिट्टी के नमूने अपने साथ ले गई है.

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