ब्रांड बिहार : बेगूसराय के दीपक बने लखनऊ के एसएसपी

लाइव सिटीज डेस्क : बेगूसराय के लाल दीपक कुमार को देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एसएसपी नियुक्त किया गया है. यह बेगूसराय सहित पूरे बिहार के लिए गौरव की बात है. दीपक एक तेज़ तर्रार पुलिस अफ़सर हैं. दीपक बेगूसराय के रामदिरी गाँव के हैं.

इससे पहले दीपक कुमार देश में कई जगह अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्हें मुजफ्फरनगर का एसएसपी भी नियुक्त किया गया था. वे   पीएसी की 32वीं वाहिनी में कमाडेंट के पद पर भी तैनात रहे थे. बेहद ईमानदार दीपक कुमार को दबाव न मानने वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है.

दीपक कुमार 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. बेगूसराय बिहार के रहने वाले दीपक ने अपनी स्कूली शिक्षा लातेहार में पूरी करने के बाद बनारस विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स में बीए की डिग्री पूरी की. फिर यह मुंबई चले गए. यहां से इन्होंने एलएलबी की डिग्री प्राप्त की.

बहुत कम लोग जानते हैं कि दीपक कुमार आईपीएस चुने जाने से पहले दानिक्स कैडर में भी सलेक्ट हुए थे. दानिक्स कैडर में इन्हें दिल्ली पुलिस में एसीपी बनाया गया था. एसीपी के पद पर कार्य करते हुए इन्होंने सिविल सर्विस का एग्जाम दिया और आईपीएस सलेक्ट हो गए. दीपक ने दिल्ली पुलिस में भी खासा नाम कमाया था. दिल्ली पुलिस में भी दीपक की गिनती बहुत ही तेजतर्रार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में होती थी.

आईपीएस बनने के बाद प्रोबेशन में इनकी तैनाती गाजियाबाद जैसे महत्वपूर्ण जनपद में की गई. वह सीओ मोदीनगर और सीओ साहिबाबाद रहे.  वह गाजियाबाद में बहुत ही लोकप्रिय हुए. प्रोबेशन पूरा होने के बाद इन्हें पीएसी में भेज दिया गया. लेकिन वह यहां चंद दिन ही रहे. उन्हें जल्द ही बागपत का एसपी बनाया गया.

बागपत में वह इतने लोकप्रिय हुए कि वहां जन जन उन्हें आज भी याद करता रहा है. बागपत में वह लगभग ढाई साल रहे. इतने समय बागपत में आज तक कोई एस पी नहीं रहा. बागपत में जिला पंचायत चुनाव के दौरान एक बसपा के सांसद का नाजायज दबाव मामने से इंकार करने पर सरकार ने इनका तबादला फिर से पीएसी में कर दिया.

इसके बाद वह सोनभद्र और रायबरेली जिलों के भी एसपी रहे, लेकिन अपने ईमानदार और नाजायज राजनीतिक दबाव न मानने की वजह से जिलों से पीएसी में जाते रहे. बाद में उन्हें मेरठ का एसएसपी बनाया गया.

जब वह मेरठ के एसएसपी थे उसी दौरान मुजफ्फरनगर में दंगे भडके थे जिनकी आंच आस पास के सभी जिलों में पहुंच गई थी. लेकिन मेरठ अकेला ऐसा जिला था जहां एक भी दंगा नहीं हो पाया था. इसका पूरा श्रेय आईपीएस अधिकारी दीपक कुमार को जाता है. मेरठ की जनता आज भी उन्हें प्रशंसित अंदाज में याद करती है. दंगों के दौरान दीपक कुमार की कर्मठता का अंद्राजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 24 में से 20 घंटा फोर्स के साथ खुद सडक पर रहते थे.

पीएसी की 32वीं वाहिनी के कमांडेंट बनने से पहले दीपक कुमार इलाहाबाद के एसएसपी थे. यहां एक दारोगा पर वकीलों के हमले के बाद दारोगा द्वारा चलाई गई गोली से एक वकील मारा गया था. इस प्रकरण में दीपक ने बिलकुल निष्पक्ष कार्रवाई कार्रवाई कराई थी.

लेकिन एक बार राजनीतिक दबाव के चलते एक बार उन्हें फिर पीएसी में भेज दिया गया.

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