जमुई में भी अपने ही अंदाज़ में दिखे डीआईजी मनु महाराज, बॉडीगार्ड के साथ दौड़ गए 5 किलोमीटर

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क (राजेश कुमार): सिंघम सुबह पांच बजे जाग जाता है फिर पांच किलोमीटर की दौड़ लगाता है. उसके बाद शुरू होता है उसके कामकाज का दौर और यही उसके फिटनेस का राज और दिनचर्या है. मुंगेर प्रक्षेत्र के डीआईजी मनु महाराज के दो दिवसीय जमुई दौरे से लौटने के बाद ऐसी ही चर्चा जमुई में चल रही है. पूछने पर लोगों ने बताया कि शुक्रवार की सुबह जमुई में सिंघम अपने अंगरक्षकों संग घूमने निकले थे और उस दौरान उन्होंने पांच किलोमीटर तक दौड़ भी लगाई.

इन सब के बीच डीआईजी मनु महाराज का दो दिवसीय जमुई दौरा और इस दौरान जिले के एक छोर से दूसरे छोर तक ताबड़तोड़ विजीट जमुई में क्राइम कंट्रोल पर सिंघम के इरादे बता रहा है. जमुई के अपने दो दिवसीय दौरे पर डीआईजी मनु महाराज ने जिले के कई थानों से लेकर लाल गलियारे स्थित नक्सलियों के मांद तक में धमक देकर यह जता दिया है कि जिलों में उनका विजिट सिर्फ मिटिंग और कोरम पूरा करनेवाला नहीं रहेगा बल्कि पुलिस अधिकारियों को उनके साथ फील्ड विजिट कर तथ्यों का जवाब भी देना होगा.

इसके पहले गुरूवार को जमुई विजीट के पहले ही दिन डीआइजी मनु महाराज ने माओवाद, अपराध और शराब तस्करों को लेकर अपनी मंशा जाहिर कर दी थी. शुक्रवार को मनु महाराज ने जिले के कई थानों का निरीक्षण किया. मनु महाराज ने इस दौरान अति नक्सल प्रभावित कई गांवों का दौरा करने के पश्चात पुलिस अधिकारियों को माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन मंत्र दिया साथ ही दुर्गम समझे जाने वाले जंगली इलाकों में मुस्तैदी से ड्यूटी को लेकर जवानों का उत्साह वर्धन किया.

मनु महाराज ने भगवान महावीर के जन्म स्थान क्षत्रिय कुंड से लेकर चरका पत्थर तक में तैनात अर्धसैनिक बल के जवानों से भी मुलाकात की और नक्सल गतिविधि से लेकर की जा रही कार्यवाही तथा उसमें आ रही दिक्कतों की जानकारी ली. आपको बता दें कि ये सभी क्षेत्र लाल गलियारे के नाम से मशहूर हैं, जहां माओवादियों के जमावड़े की खबरें बराबर आती रहती है. नक्सल इलाके में निरीक्षण के दौरान डीआईजी मनु महाराज शांति और अहिंसा के उपदेशक जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्म स्थली क्षत्रिय कुंड ग्राम पहुंचे.

वहां उन्होंने मंदिर में भगवान का दर्शन किया. इसके पश्चात वहां मौजूद लोगों के अलावा नवस्थापित पिकेट पर तैनात अधिकारियों व जवानों से कई जानकारियां प्राप्त की. डीआईजी जन्म स्थान पिकेट के अलावा गरही सीआरपीएफ कैंप, पकरी एसएसबी कैंप, चरकापत्थर और झाझा स्थित सीआरपीएफ कैंप भी गए. वहां उन्होंने अधिकारियों व जवानों को नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन मंत्र दिया.

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