बोले पप्पू यादव— नोनिया, निषाद, मल्‍लाह को अनुसूचित जनजाति में किया जाए शामिल

पटना: जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव ने बिहार सरकार की अनुशंसा के अनुरूप मल्‍लाह, निषाद, नोनिया समेत अन्‍य उपजातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग केंद्र सरकार से की है. उन्‍होंने पत्रकारों से कहा कि बिहार सरकार के सामान्‍य प्रशासन विभाग ने 2015 में मल्‍लाह, निषाद, नोनिया समेत इनकी उपजातियों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से अनुसूचित जाति में शामिल करने की अनुशंसा की थी. सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार राज्‍य सरकार की अनुशंसा की अनदेखी कर राज्‍य की जनता से नाइंसाफी कर रही है. उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार को राज्‍य सरकार की अनुशंसा के आलोक में मल्‍लाह, निषाद व नोनिया समेत इनकी उपजातियों को अनुसूचित जनजाति में शीघ्र शामिल करना चाहिए.

मधेपुरा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव

इसके अलावा सांसद पप्पू यादव ने कहा कि कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षाओं में हो रही धांधली और प्रश्‍नपत्र लीक होने से एसएससी की निष्‍पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं. एसएससी परीक्षा में सवाल लीक की घटनाओं में इजाफा हो रहा है. इससे उसकी विश्‍वसनीयता पर संकट छा गया है. उन्‍होंने कहा कि फरवरी महीने में टियर-2 परीक्षा के प्रश्‍नपत्र लीक हो गये.

इससे मेधावी और गरीब छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ी. सांसद ने कहा कि एसएससी की निष्‍पक्षता और विश्‍वसनीयता कायम करने के लिए 1994 से अब तक की परीक्षाओं की सीबीआई जांच करायी जानी चाहिए. सीबीआई जांच से मेधावी छात्रों को न्‍याय भी मिल सकेगा.

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पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर बिहार के साथ लगातार भेदभाव करने का आरोप लगाया. उन्‍होंने कहा कि केंद्र के सहयोग के कारण कई राज्‍य विकसित होते चले गये, जबकि केंद्र की उपेक्षा के कारण बिहार अभाव से ग्रसित रहा. योजना आयोग और वित्‍त आयोग के वित्‍तीय हस्‍तांतरण का फार्मूला भी बिहार के लिए लाभदायक नहीं रहा.

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उन्‍होंने कहा कि आयोग राज्यों की वित्‍तीय असमानता को पाटने में भी विफल रहा है. बिहार के विभाजन के समय कहा गया था कि विभाजन से होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष के नियंत्रण में एक विशेष कोषांग गठित होगा, लेकिन इस दिशा में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. सांसद ने कहा कि केंद्र में सरकार बदलती रही, लेकिन बिहार को उसका वाजिब हक कभी नहीं मिला.

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इसका खामियाजा बिहारवासी भुगतते रहे. इसलिए जरूरी है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्‍या, प्रति व्‍यक्ति आय, औद्योगिकीकरण, सामाजिक और भौतिक आधारभूत संरचना को देखते हुए बिहार को विशेष राज्‍य का दर्जा दिया जाए.