भगवान गोविन्द की बारात में झूमकर नाचे श्रद्धालु

लाइव सिटीज डेस्क : राणा प्रताप भवन में चल रही भागवत कथा के छठे दिन प्रभु की अनेक मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया गया. कोलकाता से पधारे श्रीकृष्णानुरागी पं. शिवम विष्णु पाठक ने कल की कथा में सर्वप्रथम दिव्य रास के प्रसंग का वर्णन किया. जिसे सुनकर श्रोतागण भावविभोर हो उठे.

 

कथावाचक ने गोपियों का भी परिचय करवाया. गोपियां कोई साधारण जीव नहीं हैं. तत्पश्चात भगवान के मथुरा गमन की कथा का वर्णन किया गया. बाद में प्रभु ने रंगभूमि में अपने मामा कंस का भी कल्याण कर दिया.

सुदामा के साथ गुरुकुल में बिताए​ दिनों का भी कथा में सूक्ष्म वर्णन किया गया. उद्धव—गोपी संवाद, गोपीगीत एवं भ्रमर गीत का वर्णन भी कथा प्रसंग में हुआ. गोविन्द ने सत्कर्मीजनों के लिए जरासंध से युद्ध हारना भी स्वीकार कर लिया और स्वयं रणछोड़ कहलाए. बाद में भगवान द्वारिकाधीश भी कहलाए.

कथाव्यास ने कल कथा के अंतिम प्रसंग में पुत्री के महत्व का वर्णन किया. पुत्र होगा भाग्य से, पुत्री होगी सौभाग्य से. खूब धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण का माता रुक्मिणी के संग विवाह संपन्न हुआ. इस प्रसंग का सभागार में मौजूद सभी भक्तों ने खूब आनंद लिया.

कल की कथा में रेणू शर्मा, निर्मला देवी अग्रवाल, मदन अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, केशव शरद, काशी के प्रकांड विद्वान हरी राम भारद्वाज तथा मुजफ्फरपुर के अनेक भक्त भी उपस्थित थे. कथा का विश्राम पर दिव्य सुदामा चरित्र का वर्णन होगा.

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