इस पिता, पुत्र और पति का दर्द एक बार आप पढ़ लें, तो आपका कलेजा फट पड़ेगा …

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: यह कहानी है पति, पिता और पुत्र की जो अब वर्तमान की परेशानियों से उब चुका है और जीना नहीं चाहता है. आगे की पूरी कहानी शिवकुमार के शब्दों में बयां की है. इस कहानी में एक पति की बेबसी है, पिता का दर्द है और पुत्र का दायित्व है.

बेटा होने का दर्द :

इस बेटे की पुकार कौन सुनेगा, उसकी चीख उसकी कराह उसके दर्द को कौन समझेगा. क्या बेटा होना कोई पाप है. तो जवाब आएगा नहीं. मां- बाप बच्चों के लिए वरदान होते हैं. बात एक ऐसे ही शख्स शिवकुमार की है. बिहार, मुंगेर के रहने वाले इस इंसान ने यह तय किया है कि मुझे अब नहीं रहना इस दुनिया में. जहां रिश्तों की कोई अहमियत नहीं. एक आम आदमी की तरह जिंदगी गुजारने का ख्वाब संजोए शिवकुमार ने बेहतर जिंदगी का सपना देखा था. सोचा था शादी के बाद जिंदगी आसान हो जाएगी… लेकिन वो हो ना सका. उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी पत्नी इतनी संगदील होगी. आज से ठीक सात साल पहले शिवकुमार की शादी बिहार नालंदा की रहने वाली डॉ प्रतिमा कुमारी से हुई थी. शुरुआत में सबकुछ ठीक ठाक रहा. एक परी सी बेटी घर में आई. लेकिन गुजरते वक्त के साथ रिश्ते में कड़वाहट आने लगी. हालात तब बद से बदतर हो गए जब डॉ प्रतिमा ने अपने बुजुर्ग सास ससुर और ननद के साथ गलत व्यवहार किया.

पति की पुकार/ उसका दर्द :

‘’ हां मैं सुसाइड करना चाहता हूं/ अब नहीं जीना मुझे”

रिश्तों का तानाबाना सहयोग और समर्थन का होता है. विश्वास और सम्मान का होता है. जहां यह नहीं होता वहा जिंदगी नहीं होती. शिवकुमार कुछ ऐसी ही कैफियत के शिकार हो गए हैं. पत्नी की तमन्ना, कि पति सिर्फ उसका है. पति का परिवार उसके सगे-संबंधी से कोई लेना देना नहीं. पति की ये जिद, पत्नी के परिवार के साथ-साथ उसका भी परिवार है. लेकिन ये हो ना सका. प्रतिमा का जुल्म लगातार बढ़ता गया. शिवकुमार के माता- पिता और बहन को लगातार पति की अनुपस्थिति में तंग करते रहे… तंग आकर शिवकुमार ने पत्नी को तलाक देने का फैसला किया और कोर्ट में अर्जी डाल दी. बावजूद इसके प्रतिमा का जुल्म थमने का नाम नहीं ले रहा था. उसने शिवकुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी. रिश्तों के आगे बेबस शिवकुमार ने यह तय कर लिया अब मुझे नहीं रहना इस दुनिया में. मैं सुसाइड करना चाहता हूं. शायद प्रतिमा को इस बात का एहसास नहीं कि वो खुद एक मां है. उसकी अपनी भी एक संतान है. आदमी को चाहिए वक्त से डर रहे. समय अक्सर खुद को दोहराता है…

पिता होने का दर्द :

दिल्ली में काम करने वाले शिवकुमार के लिए जिंदगी बड़ी मुश्किल भरी हो गई. दिल्ली की नौकरी और पत्नी द्वारा दायर किए गए केस के बीच वो लगातार परेशान रहने लगा. एक तरफ उसके माता पिता बहन औऱ परिवार तो दूसरी तरफ पत्नी और वो मासूम सी बेटी. वो अक्सर अपनी बेटी को लेकर चिंतित रहता. एक पुत्र, पति औऱ पिता के लिए इससे बड़ा संकट क्या हो सकता है जहां वो अपनी आंखों के सामने अपने सारे रिश्तों को बिखरते हुए देख रहा हो … एक तमाशबीन की तरह. सब कुछ होते हुए भी वो अकेला हो. जाहिर है फैसला होना चाहिए. लेकिन सुसाइड किसी भी सूरत में सही फैसला नहीं हो सकता. समस्या से झूझना और उससे बाहर निकलना होगा. शिवकुमार को एक नजीर पेश करनी होगी. और उसका सबसे सरल उपाय है रिश्तों के गांठ को सुलझाना. ताकि कोई अपना छूटे ना कोई अपना रूठे ना. डॉ प्रतिमा को भी इसका सम्मान करना होगा. सम्मान और समझौते बिना जिंदगी की गाड़ी नहीं चलती.

पुत्र होने का दर्द :

दरअसल शिव कुमार के साथ अब समस्या ये हो गई है कि वो अपने 80 साल के बुजुर्ग मां- बाप की सेवा तक नहीं कर पा रहा है.. शिव कुमार दिल्ली में नौकरी करता है.. लेकिन केस की वजह से अक्सर घर आ रहा है… पत्नी ने पिता पर भी मारपीट का आरोप लगा दिया… ऐसे में जो इंसान खुद ने अपनी दिनचर्या का काम नहीं कर पा रहा हो वो भला किसी के साथ क्या मारपीट भी कर सकता है क्या… खैर शिव कुमार की परेशानी ये है कि वो एक सक्षम पुत्र होते हुए भी अपने मां- बाप की सेवा नहीं कर पा रहा है और उसके पिता उम्र के इस पड़ाव में कोर्ट का चक्कर काटने को मजबूर हैं और समाज के ताने सहने को बेबस… शिवकुमार करे भी तो क्या करे…

शिवकुमार ने अपना दर्द बयां किया है. इनकी पत्नी ने सारी हदें पार कर दी है. शिवकुमार कहते हैं कि इनकी पत्नी ने इनके बूढ़े मां, बाप और कुंवारी बहन को घर के बाहर निकाल दिया है. इनके आंसू बता रहे हैं कि इनके साथ कितना अन्याय हुआ होगा. आज एक बेटा होने के नाते, एक भाई होने के नाते हर तरफ से मजबूर हूं मैं.

इन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि आपका परिवार अच्छे और बुरे में आपके साथ रहें तो जायज है. और लड़का अपने परिवार के साथ रहे तो नाजायज है. वह सिर्फ और सिर्फ अपनी पत्नी के साथ रह सकता है. उसके लिए परिवार के मायने ही बदल जाते हैं.

इसने आगे कहा कि मेरे चुप रहने का यह नतीजा निकला है कि आपने ऐसा किया. शिव बताते हैं कि पत्नी कुछ भी कहती जाए, कुछ भी कहती जाए, कोई भी कहानी कहती जाए.. आप मान लेंगे. लेकिन लड़के को हर बात साबित करना होगा. एक पति-पत्नी के बीच अगर किसी बात को लेकर मतभेद है तो क्या इसका कोई सबूत भी हो सकता है. इसको हम कैसे प्रूफ कर सकते हैं. हमें भी दर्द होता है … कैसे साबित करें हम खुद को.

शिवकुमार ने रोते हुए अपने दर्द को बयां किया है. इनकी बातें सुनकर आपका कलेजा भी फट जाएगा. शिव ने अपनी पत्नी पर यह आरोप लगाया है कि इनकी पत्नी ने इनपर झूठा इलजाम लगाया है. इनकी पत्नी ने इनसे झूठा आरोप लगाने, झूठा केस करने की बात कही है. इन्होंने आगे कहा कि औरत सम्मानीय है, औरत पूजनीय है. इसका यह मतलब बिलकुल नहीं कि आप इसका नाजायज फायदा उठाएंगे.

दरअसल जो घटना है, दिखाया गया हुआ ठीक उसके विपरीत है. लड़के ने लड़की से तंग आकर तलाक की मांग की है. लड़के ने लड़की पर यह आरोप लगाया है कि उसे झूठे केस में फंसाया गया है. हालांकि लड़के ने यह साफ़-साफ़ कह दिया है कि मुझे अब इस रिश्ते से मुक्ति चाहिए…

आपको बता दें कि शिवकुमार और प्रतिमा देवी के कई मामले कोर्ट में विचाराधीन है.. लाइव सिटीज ने ये स्टोरी शिवकुमार के भेजे हुए वीडियो के आधार पर की है.. जो उन्होंने अपने वीडियो में कहा.. वही हमनें यहां लिखा… लाइवसिटीज कोर्ट का और महिलाओं का सम्मान करता है.. हमारा मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है..

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