वीरप्पन को गुरु मानता है जमुई का यह निर्दयी अपराधी, उसके आतंक से दहशत में अगड़ी जाति

लाइव सिटीज़, सेंट्रल डेस्क (राजेश कुमार) : वीरप्पन उसका आइडियल है और उसे पसंद है कि लोग उसे वीरप्पन बोलें. उसके घर के लोग भी अब उसे वीरप्पन ही कहते हैं. जरायम की दुनियां में शीर्ष पर पहुंचने की बहुत भूख है उसे. वह आदमी को सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर गोली मार देता है. और तो और उसने दो अगड़ी जातियों को गांव छोड़ने का फरमान भी सुना रखा है.

जी हां .. हम बात कर रहे हैं जमुई के एक ऐसे अपराधी की जो निर्दयी है और अपराध दर अपराध कई घटनाओं को अंजाम दिए जा रहा है. लोग उसे साइको क्रिमिनल भी मानते हैं. उसका वास्तविक नाम सुभाष महतो उर्फ वीरप्पन है और वह सदर थानाक्षेत्र के काकन गांव का रहनेवाला है. बताया जा रहा है कि वीरप्पन वहां के वर्तमान मुखिया का भतीजा है जो काकन गांव में दशकों से चली आ रही जातीय और वर्चस्व को लेकर हो रहे संघर्ष की उपज है.

जानकारी मिल रही है कि गुरुवार की  शाम वीरप्पन ने काकन में फिर से आतंक मचाया है और साथियों संग मिलकर गांव के ही एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी है. मृतक की पहचान इसी गांव के विनोद सिंह के पुत्र बीस वर्षीय मणिकांत सिंह के रूप में हुई है. परिजन हत्या में वीरप्पन एवं उसके सहयोगियों के हाथ होने की बात कह रहे हैं. वीरप्पन का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है.

घटना के संबंध में बताया जाता है कि शाम के पांच बजे मणिकांत अपने घर पर था. इसी दौरान आठ-दस की संख्या में आए अपराधियों उसे जबरन घर से उठा लिया. बाद में अपराधियों ने पहले उसे दौड़ा-दौड़ा कर बुरी तरह से पीटा और बाद में घर से कुछ कदम दूर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक को सीना, पेट और पैर में गोली लगी है. घटना की सूचना पाकर मौके पर दलबल के साथ पहुंचे थानाध्यक्ष सिद्धेश्वर पासवान मामले की तहकीकात में जुटे है. घटना को लेकर पूरे गांव में दहशत का माहौल है.

इसके पूर्व भी वीरप्पन ने कई अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया है और उसकी प्राथमिकी संबंधित थानों में दर्ज़ है. पुलिस सूत्र बताते हैं कि सुभाष उर्फ वीरप्पन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. वह साइको क्रिमिनल है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित हो चुकी है और गिरफ्तारी को लेकर छापामारी शुरू है. जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

आपको बता दें कि दक्षिण भारत का वीरप्पन भी साइको क्रिमिनल था ..कभी यह नाम देश भर में आतंक का पर्याय था. हत्या अपहरण और तस्करी उसके पेशे तथा शगल में शामिल थे. दशकों तक वह जरायम की दुनियां का आतंक बना रहा फिर कई राज्यों की पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स बना कर उसकी मौत के साथ उसके आतंक को समाप्त किया था. बताया जाता है कि बीरप्पन साइको था और अपनी दुधमुही बच्ची की हत्या उसने बच्ची के रोने भर पर कर दी थी. उसके आतंक से परेशान होकर तब कई राज्यों की पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन कर उसका काम तमाम किया था.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*