‘कार्बन मुक्त अर्थव्यवस्था’ की मुख्य कुंजी है सीमा पार अक्षय ऊर्जा व्यापार’

लाइव सिटीज, पटना : सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा व्यापार पर केंद्रित एक कम्यूनिकेशन कार्यशाला ‘ट्रांस बाउंड्री एनर्जी ट्रेड बिटविन इंडिया एंड नेपाल’ का आयोजन किया. इसका मकसद दक्षिण एशिया में अक्षय ऊर्जा कारोबार (रिन्युएबल एनर्जी ट्रेड) की पहल को मजबूत करने के लिए एक खुली परिचर्चा करना था, ताकि क्षेत्र में ‘कम कार्बन विकास मार्ग’ (लो कार्बन डेवलपमेंट पाथवे) को प्रोत्साहित किया जा सके.

यह कार्यशाला विभिन्न स्टैक्होल्डर्स को सीमा पार अक्षय ऊर्जा संबंधी व्यापार व लेनदेन के अवसरों के बारे में सूचित तथा जागरूक करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश रही. इसका उद्देश्य एक ऐसी पहल को बल देना है कि कैसे मॉनसून-पूर्व अवधि में बिहार से पैदा सौर बिजली नेपाल को मदद पहुंचा सकती है और उसी अनुरूप नेपाल में पैदा पनबिजली शक्ति कैसे जाडे़ के दिनों में बिहार के ‘एनर्जी लोड’ का प्रबंधन कर सकती है.

इस अवसर पर सीड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रमापति कुमार ने बिहार की अक्षय ऊर्जा संबंधी संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि बिहार एक तेज गति से विकसित होती अर्थव्यवस्था है और ‘पीक पावर डिमांड’ में तीव्र विकास को महसूस कर रही है, लेकिन विशाल संभावनाओं के बावजूद राज्य में अक्षय ऊर्जा का योगदान केवल 326.15 मेगावाट है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अक्षय संसाधनों की अधिकता को ‘पीक आवर्स’ में बेहतर ऊर्जा पहुंच के लिए, कम लागत तथा कम ‘वेस्टेज’ वाले समाधानों के साथ लेनदेन करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि नेपाल के साथ बिजली व्यापार से शुरुआत में बिजली के ऊंचे निर्यात को बल मिलेगा, जिससे भारत के पावर प्लांटों को निर्यात संबंधी ज्यादा राजस्व मिलने के अवसर प्राप्त होंगे. वहीं बाद में यह घरेलू बिजली उत्पादन में ताजा निवेश की आवश्यकता को कम करेगा, क्योंकि विकल्प के रूप में इस घरेलू डिमांड को नेपाल से पनबिजली आयात के जरिए पूरा किया जा सकता है. दोनों ही मौकों पर भारत को आर्थिक व पर्यावरणीय लाभ होगा.

रमापति ने आगे सरकार से नेपाल के साथ सीमा पार अक्षय ऊर्जा व्यापार व लेनदेन को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी क्रियान्वयन संबंधी मुद्दों को निपटाने की अपील की, जिससे न सिर्फ बिहार को अपनी वर्तमान ऊर्जा जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के जरिए बिजली आपूर्ति के विविध विकल्पों के बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा और विश्वसनीयता की स्थिति में सुधार होगा।

इस कम्यूनिकेशन वर्कशॉप में बिहार राज्य के विविध क्षेत्रों से आए मीडिया प्रोफेशनल्स ने मुख्य तौर पर भागीदारी की. परिचर्चा में बिहार और नेपाल के बीच रिन्यूएबल एनर्जी ट्रेड की राह में आने वाली संभावित चुनौतियों, भावी अवसरों तथा विभिन्न लाभों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें मुख्य तौर पर यह बात सामने आई कि क्षेत्र स्तर पर कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने, अक्षय ऊर्जा संबंधी एक सततशील मार्केट में निवेश करने तथा सीमा पार एनर्जी ट्रेड के क्रियान्वयन के लिए समुचित माहौल का निर्माण करने की आवश्यकता है.

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