‘रुनकी-झुनकी’ के बाद अब छठ मईया पर आया ‘दे द एगो सोनचिरैया’, यार जादूगर फेम नीलोत्पल मृणाल बोले- बेटियों को समर्पित है मेरा गीत

लाइव सिटीज, राजेश ठाकुर : लोकआस्था का महापर्व छठ 48 घंटे के बाद नहाय खाय से शुरू हो जाएगा. मंगलवार यानी 8 नवंबर को नहाय खाय है. लेकिन, आज से 48 घंटे पहले दिवाली के दिन डार्क हॉर्स, औघड़ और यार जादूगर जैसी चर्चित किताबों के लेखक नीलोत्पल मृणाल ने छठ महापर्व को लेकर मनौती गीत लांच किया है. ‘दे द एगो सोनचिरैया…’ गीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने छठ मईया से सोनचिरैया जैसी बेटी देने की मांगी है. उन्होंने लाइव सिटीज से बात करते हुए कहा कि हमारा यह गीत बेटियों को समर्पित है.

देश के ख्यातिलब्ध युवा लेखक व साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. पिछले दिनों गमछा को लेकर भी वे काफी तेजी से वायरल हुए थे. वे कांधे पर गमछा लिये ग्रामीण वेशभूषा पिछले दिनों दिल्ली के होटल में पहुंच गए थे. गमछा को लेकर होटल वाले से उनका विवाद हो गया था. बाद में मामला सलटा. मैनेजर को माफी मांगनी पड़ी. नीलोत्पल मृणाल ने सबसे पहले ‘हां हम बिहारी हैं, हां हम बिहारी हैं…’ गीत को सोशल मीडिया पर लांच किया था. यह गीत काफी हिट किया था.

इस गीत को लेकर 2016 में भी लाइव सिटीज ने उनसे बात की थी. उसी समय यह भी जानकारी उजागर हुई थी कि नीलोत्पल मृणाल मूल रूप से बिहार के ही रहने वाले हैं. उनका पैतृक घर संग्रामपुर है. संग्रामपुर बाजार के निकट ही मोनी बाबा मंदिर पोखर के निकट ही उनका घर है. लेकिन वे सब दिन अपने ननिहाल दुमका में रहे हैं. दुमका अब बंटवारा होने के बाद झारखंड में चला गया है. वे कहते हैं कि दोनों जगहों से मेरा इमोशनल रिलेशन हो गया है. मैं बिहार और झारखंड दोनों का हूं. आज शनिवार को जब उनसे बात हुई तो इस समय भी वे दुमका में ही थे और उन्होंने कहा कि छठ तक वे यहीं रहेंगे.

दिवाली पर नीलोत्पल मृणाल ने छठ मईया का मनौती गीत लांच किया है. इसमें वे छठी मईया से बेटी देने की कामना कर रहे हैं. उन्होंने इस गीत को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है- ‘छठ के गीतों में पुत्री जन्म की कामना, उसके द्वारा जिम्मेदारियों को उठाने के भरोसे का तथा उसी से कुल के उद्धार की आकांक्षा का ये गीत देश की सभी बेटियों को समर्पित है. कलम कुछ नहीं लिखती, वो बस माध्यम है. सब छठी मईया की कृपा है और जो भी उनसे प्रसाद रूप में मिला, वो आपके सामने है.’ सोनचिरैया वाला यह गीत सोशल मीडिया काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इसे उतनी ही तेजी से लोग शेयर भी कर रहे हैं.

नीलोत्पल कहते हैं कि लोक पर्वों में बेटी की चाहत कम दिखती है. छठ में भी लोग बेटों की चाहत करते हैं. महिलाएं गाती हैं, छठ में एगो बेटा द दे त दउरा उठा के जाई… वे कहते हैं कि दउरा उठाने का भाव जिम्मेदारी वाला है और पुरुषों से जुड़ा है, जबकि गांव में घर के भंसा किचन से लेकर खेतों में फसल की कटाईबुआई तक के काम महिलाएं ही संभालती हैं. वे यह भी कहते हैं कि भोजपुरी में बेटी के लिए गीत है, पर उसमें है कि बेटी होती तो बयना बांटती… यह भाव है. अब हमारा समाज बदल रहा है. बराबरी की बात हो रही है. खेल से लेकर सेना तक में हमारी बेटियां जा रही हैं. ऐसे में इस बार छठ के मौके पर हमने सोनचिरैया वाला गीत गाया है. इसमें क्रिक्रेट, ओलंपिक, सेना, पायलट आदि के क्षेत्र में बेटियों का जलवा दिखाया गया है.

बहरहाल, छठ मइया के गीतों में बेटी की कामना पहले भी देखी गयी है. वह भी रुनकी झुनकी जैसी बेटी, गांव की माटी की सोंधी खुशबू लिये हुए. एक गीत में कहा गया है लिखा भी गया है- सांझ के देबई अरघिया, और किछु मांगियो जरूर, पांचों पुत्र एक धिया (बेटी), धियवा मंगियो जरूर…’ वहीं सबसे लोकप्रिय गीत है- ‘रूनकी झुनकी बेटी मांगीला, पढ़ल पंडितवा दामाद, छठी मईया दर्शन दींही ना आपन…’ हालांकि, छठ के शुरू होने में भले ही अभी दो दिन विलंब है, लेकिन गली-मोहल्ले में छठ के कर्णप्रिय गीत अभी से गूंजने लगे हैं