कौन लड़ेगा आरा : चर्चा में है भाजपा के आर के सिंह का अहंकार – जदयू की मीना सिंह का संस्‍कार

लाइव सिटीज (पारुल पांडेय) : आरा में हूं. मकसद अपने संदर्भ का शोध है. पर, आरा में आप बगैर राजनैतिक चर्चा के नहीं रह सकते. मैं भी नहीं रह सकी. 2019 के लोक सभा चुनाव को लेकर आरा की बतकही शुरु है. गॉसिप स्‍क्‍वायड के लोग कहेंगे कि पहले प्रत्‍याशी तो फाइनल करो. 2014 में सुपौल से आकर आरा में आर के सिंह जीते थे. मोदी महालहर था. तब जदयू से मीना सिंह और राजद से भगवान सिंह कुशवाहा लड़े थे. अब तीनों एनडीए गठबंधन में हैं. आर के सिंह भाजपा में, मीना सिंह जदयू में और भगवान सिंह कुशवाहा रालोसपा में.

आरा के लोग कहते हैं, एनडीए से चुनाव तो कोई एक ही लड़ेगा. आर के सिंह सिटिंग हैं, लेकिन नीतीश कुमार ऐेसे थोड़े न आरा छोड़ देंगे. मीना सिंह मजबूती से जदयू और नीतीश कुमार के साथ रहीं हैं. भगवान सिंह कुशवाहा रालोसपा में उपेन्‍द्र कुशवाहा के साथ हो लिए हैं. सो, यह संभव नहीं है कि आसपास मतलब काराकाट में उपेन्‍द्र कुशवाहा और आरा में भगवान सिंह कुशवाहा अर्थात दोनों कुशवाहा उम्‍मीदवार बनें. वैसे भी राजद और इसके गठबंधन का उम्‍मीदवार आरा में स्‍थायी नहीं रहता. लालू यादव की भरोसेमंद रहीं कांति सिंह ने फिर से आरा से अधिक काराकाट में ध्‍यान केंद्रित कर रखा है.

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मीना सिंह दावेदारी छोड़ने के मूड में नहीं हैं. लेकिन मीना सिंह की जिद तब पूरी होगी, जब नीतीश कुमार आरा की सीट को भाजपा की झोली से छीन जदयू में ले आएं. आरा में कहते हुए लोग मिल गए कि चुनाव भले आर के सिंह जीत गए, पर क्षेत्र में उनसे अधिक मीना सिंह दिखतीं हैं. न्‍योता से लेकर कार्यक्रम तक में. मीना सिंह के संस्‍कार – आर के सिंह के अहंकार को भी लोग ठीक से बयां कर देते हैं.

कहते हैं, आईएएस रहे आर के सिंह का गुस्‍सा आज भी नाक पर बैठा होता है. वे क्षेत्र में इतना कम आए हैं कि बहुत लोग अपने सांसद को पहचानते भी नहीं. जबकि मीना सिंह घूमती ही रहतीं हैं. पर, इधर के दिनों में चुनाव नजदीक देख सिंह ने आरा की विजिट बढ़ा दी है.

आर के सिंह केंद्र में मंत्री हैं. वह भी ऊर्जा मंत्री. सिंह के मंत्री बनने का किस्‍सा आरा के लोग बताते हैं. कहते हैं, बिहार भाजपा का कोई भी नेता आर के सिंह को नहीं पसंद करता. फिर भी वे मंत्री बन गए. लोग मंत्री बनने के बाद पटना के स्‍वागत समारोह का याद दिला देते हैं. साथ में, अश्विनी कुमार चौबे भी मंत्री बनाए गए थे. पटना में जहां चौबे के स्‍वागत में बिहार भाजपा के सभी दिग्‍गज नेता मौजूद थे, वहीं सिंह के स्‍वागत समारोह से सभी नदारद. सो, ऐसा मानने वालों का कहना है कि आर के सिंह को लेकर बिहार भाजपा की कोई दिलचस्‍पी नहीं रहने वाली है. सिंह साहब का खेला जो भी होगा, दिल्‍ली से होगा.

कहने वाले कह गए कि आरा के लोगों को आर के सिंह से मिलना भी मुश्किल होता है, जबकि मीना सिंह के पटना-दिल्‍ली के ठिकाने पर जदयू संग भाजपा के नेता-कार्यकर्ता भी बराबरी में दिखेंगे. मीना सिंह मिलने आए सबों का स्‍वयं ख्‍याल रखतीं हैं. वैसे आरा की खबर यह भी है कि मंत्री होने के नाते आर के सिंह के विभाग में जितनी कंपनियां हैं, वह सीएसआर के तहत अभी आरा के कई इलाकों में काम करा रही है. सो, आरा में एनडीए प्रत्‍याशी को लेकर जोरदार टक्‍कर होने वाली है. प्रत्‍याशी के बाद ही चुनाव की बनती-बिगड़ती सूरत दिखेगी.

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